राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर IGNCA के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी द्वारा की गयी कथित अनियमितताओं की जांच की मांग दोहराई है। उन्होंने PMO को भेजे गये पहले पत्र में उठाए गए सवालों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, उससे अवगत कराने की मांग की है। पेश है राजद सांसद का पूरा पत्र:

पूर्ववर्ती छत्तीसगढ़ लोक आयोग (लोकायुक्त) जांच प्रतिवेदन में कारवाई की अनुशंसा एवं महानिदेशक लेखा परीक्षा (केंद्रीय व्यय) के ऑडिट आपत्तियों के बावजूद क्रमशः नियुक्ति एवं पद पर बनाए रखने की स्वतंत्र जांच, तत्काल पदमुक्त करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही के संबंध में संस्मरण माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi को लिखा पत्र।

मेरे द्वारा लगभग एक माह पूर्व भी आपको विस्तृत पत्र प्रेषित किया गया था, जिसमें डॉ. सच्चिदानंद जोशी से संबंधित गंभीर तथ्यों, शिकायतों एवं उपलब्ध अभिलेखों की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराया गया था। मेरे पूर्व पत्र के बावजूद आज तक इस प्रकरण में कोई प्रभावी, स्वतंत्र एवं समयबद्ध कारवाई नहीं हुई है और डॉ. जोशी महत्वपूर्ण सार्वजनिक पद पर बने हुए हैं, तो अब यह प्रश्न केवल डॉ. सच्चिदानंद जोशी की भूमिका तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि सीधे-सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय, संस्कृति मंत्रालय तथा उनकी नियुक्ति/निरंतरता की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ जाता है।

सबसे गंभीर प्रश्न नियुक्ति और निरंतरता को लेकर

सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि यदि डॉ. जोशी के पूर्व कार्यकाल से संबंधित प्रतिकूल छत्तीसगढ़ लोक आयोग (लोकायुक्त) अभिलेख, नियुक्तियों से जुड़े भ्रष्टाचार और बाद में IGNCA के कार्यकाल से संबंधित गंभीर ऑडिट आपत्तियां उपलब्ध थीं, तो केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पद पर उनकी नियुक्ति/निरंतरता से पहले इन सभी तथ्यों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया?

और यदि इन तथ्यों का परीक्षण किया गया था, तो उन्हें महत्वपूर्ण सार्वजनिक पद पर बनाए रखने का आधार क्या था?

1. छत्तीसगढ़ लोक आयोग (लोकायुक्त) की कार्यवाही को नजरअंदाज करने का आधार क्या था?

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में तत्कालीन कुलपति के रूप में डॉ. सच्चिदानंद जोशी से संबंधित नियुक्ति प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्न उठे थे। उपलब्ध अभिलेखों में पात्रता, चयन मानदंड, अंकों के निर्धारण तथा अयोग्य अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल किए जाने से संबंधित आपत्तियों का उल्लेख है।उपलब्ध लोक आयोग (लोकायुक्त) अभिलेख में डॉ. जोशी के संबंध में प्रथम दृष्टया तथ्य प्रमाणित पाए जाने के आधार पर छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम, 2002 की धारा 11(1) के अंतर्गत विधि अनुसार कार्रवाई की अनुशंसा का उल्लेख है।

यह स्थिति प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष एक अत्यंत गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़ा करती है-

जब ऐसी अनुशंसा का अभिलेख मौजूद था, तो केंद्र सरकार के अधीन महत्वपूर्ण पद पर उनकी नियुक्ति से पहले इसका परीक्षण किसने किया?

क्या

  • सतर्कता सत्यापन (Vigilance verification) कराया गया?
  • पूर्ववर्ती जांचों का परीक्षण किया गया?
  • लोक आयोग की अनुशंसा को नियुक्ति फाइल में रखा गया?
  • संबंधित मंत्रालय ने नियुक्ति से पहले प्रतिकूल अभिलेखों की समीक्षा की?और यदि समीक्षा की गई तो किस अधिकारी ने डॉ. जोशी को उपयुक्त माना?

इन प्रश्नों का उत्तर अब आवश्यक है।

2. IGNCA की महानिदेशक लेखा परीक्षा (केंद्रीय व्यय) द्वारा ऑडिट रिपोर्ट ने गंभीर प्रश्न उठाए हैं

महानिदेशक लेखा परीक्षा (केंद्रीय व्यय) की IGNCA संबंधी Inspection Report, जो वर्ष 2016-17 से 2021-22 की अवधि को कवर करती है, IGNCA के वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रबंधन के संबंध में अनेक गंभीर आपत्तियां दर्ज करती है।विशेष रूप से प्रोफेसर पदों की नियुक्ति में पात्रता एवं अनुभव संबंधी अभिलेखों की उपलब्धता पर प्रश्न; शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया की जांच में रिकॉर्ड की कमी; पात्रता संबंधी शर्तों में छूट का पर्याप्त अभिलेख उपलब्ध न होना; भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा एवं उचित कार्रवाई की आवश्यकता; इत्यादि जैसी बातें ऑडिट में दर्ज हैं।

यहां प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष सीधा प्रश्न है-जिस अवधि में डॉ. जोशी IGNCA के शीर्ष प्रशासनिक दायित्व पर हैं, उसी अवधि की नियुक्तियों में महानिदेशक लेखा परीक्षा (केंद्रीय व्यय) के Inspection Report द्वारा गंभीर प्रश्न उठाए गए; तो उन निर्णयों की स्वतंत्र जवाबदेही आज तक क्यों निर्धारित नहीं हुई?

3. करोड़ों रुपये की धनराशि पर ऑडिट आपत्तियां

I. ऑडिट निरीक्षण में लगभग ₹6.5 करोड़ की राशि के संबंध में मंत्रालय को धनराशि वापस किए जाने की आवश्यकता का उल्लेख है। इसी प्रकार लगभग ₹10.67 करोड़ की राशि के लंबे समय तक IGNCA के पास रहने तथा मंत्रालय को वापस न किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज की गई।

II. इसके अतिरिक्त, छह क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना तथा संविदा कर्मचारियों की नियुक्तियों के संबंध में आवश्यक Ministry of Culture तथा Ministry of Finance की स्वीकृतियों के रिकॉर्ड पर उपलब्ध न होने की बात भी ऑडिट में दर्ज है।

इन मामलों में अभी तक ना कोई ज़िम्मेदारी तय हुई है ना ही कोई कारवाई हुई है । इस कृत्य से प्रतीत होता है की डॉ॰ जोशी को प्रधानमंत्री कार्यालय एवं संस्कृति मंत्रालय के द्वारा भ्रष्टाचार करने हेतु ब्लैंक चेक देकर ही नियुक्ति की गई है ।

4. वाराणसी स्थित गांधी विद्या संस्थान के संबंध में गंभीर आरोप

मेरे संज्ञान में गांधी विद्या संस्थान, राजघाट, वाराणसी से संबंधित IGNCA की गतिविधियों, पुनर्निर्माण/प्रबंधन तथा उससे जुड़े व्यय को लेकर गंभीर शिकायतें आई हैं।विशेष रूप से लगभग ₹60 लाख के व्यय, संस्थान पर नियंत्रण स्थापित करने के प्रयास तथा पुनर्निर्माण के नाम पर किए गए खर्च की जांच आवश्यक है।यदि उक्त धनराशि वास्तव में खर्च की गई है, तो उसके Administrative Approval, Financial Sanction, Tender/Work Order, Bills, Vouchers, Measurement Book, Utilisation Certificate तथा संबंधित भुगतान अभिलेखों की स्वतंत्र एवं विस्तृत वित्तीय जांच कराई जाए, ताकि व्यय की वैधता, स्वीकृति प्रक्रिया, कार्य की वास्तविकता तथा सरकारी धन के उपयोग में किसी भी प्रकार की अनियमितता की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जा सके।

5. वाराणसी केंद्र की 2024-25 नियुक्तियों की विशेष जांच

IGNCA के वाराणसी केंद्र में वर्ष 2024-25 के दौरान हुई नियुक्तियों के संबंध में भी गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। विशेष रूप से कुल पांच पदों की नियुक्ति में आरक्षण रोस्टर के पालन, अभ्यर्थियों की पात्रता, चयन प्रक्रिया तथा पक्षपात के मामले सामने आए है।अतः प्रत्येक पद के लिए स्वीकृत पद - आरक्षण रोस्टर -विज्ञापन - प्राप्त आवेदन- पात्र/अपात्र अभ्यर्थी - स्क्रीनिंग - अंक - साक्षात्कार - चयन समिति की कार्यवाही - अंतिम नियुक्ति - अनुमोदन का ज़िम्मेदारी पूर्वक पदवार एवं अभ्यर्थीवार ऑडिट कराया जाए। यदि जांच में किसी अभ्यर्थी को नियम विरुद्ध लाभ देने अथवा किसी पात्र अभ्यर्थी की अनुचित रूप से उपेक्षा किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कारवाई भी किया जाए।

6. पिछले दस वर्षों के सभी क्षेत्रीय केंद्रों की जांच

डॉ. जोशी के कार्यकाल से संबंधित IGNCA के सभी क्षेत्रीय केंद्रों-विशेषकर वाराणसी, जम्मू/श्रीनगर, रांची, वडोदरा, गोवा, तिरुवनंतपुरम एवं पुडुचेरी-में केंद्रों की स्थापना एवं मंत्रालयीय स्वीकृति, बजट-अनुदान एवं व्यय, भवन/किराया/निर्माण, खरीद-निविदा, नियमित/संविदा नियुक्तियां, पदोन्नति/प्रतिनियुक्ति, आरक्षण रोस्टर, चयन प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की योग्यता एवं दस्तावेज, यात्रा/मानदेय, परामर्श सेवाओं तथा संबंधित अधिकारियों की नोटशीट एवं अनुमोदनों की स्वतंत्र एवं विस्तृत जांच कराई जाए, क्योंकि ऑडिट में क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना एवं आवश्यक मंत्रालयीय स्वीकृतियों के संबंध में गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

7. रांची केंद्र की शिकायतों की भी स्वतंत्र जांच हो

रांची क्षेत्रीय केंद्र के संबंध में कर्मचारियों पर दबाव, मानसिक प्रताड़ना, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तथा कर्मचारियों के इस्तीफे से संबंधित शिकायतों की भी जांच कराई जाए।किसी कर्मचारी का इस्तीफा स्वैच्छिक था या प्रशासनिक दबाव का परिणाम-इसका निर्धारण केवल कार्यालयी रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं गोपनीय कर्मचारी बयान लेकर किया जाना चाहिए।

8. प्रमोशन एवं नियुक्तियों में पक्षपात

IGNCA में पिछले दस वर्षों के दौरान हुई महत्वपूर्ण पदोन्नतियों एवं नियुक्तियों में पात्रता, वरिष्ठता, APAR/ACR, DPC कार्यवाही, चयन मानदंड, आरक्षण नियम तथा तुलनात्मक अभ्यर्थी अभिलेखों की स्वतंत्र जांच कराई जाए और जहां भी नियमविरुद्ध लाभ दिए जाने की पुष्टि हो, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

9. पिछले दस वर्षों के वित्तीय निर्णयों की विशेष जांच

डॉ. जोशी के IGNCA में सदस्य-सचिव के रूप में कार्यकाल से संबंधित पिछले दस वर्षों के सभी महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णयों की जांच कराई जाए। विशेष रूप से खरीद, निविदा, निर्माण, किराया, परामर्श, यात्रा, कार्यक्रम, मानदेय, अनुदान, क्षेत्रीय केंद्र, नियुक्तियां एवं अन्य वित्तीय स्वीकृतियों का परीक्षण किया जाए। Director General of Audit (Central Expenditure) की Inspection Report में पहले ही विभिन्न वित्तीय एवं प्रशासनिक मामलों पर गंभीर टिप्पणियां दर्ज हैं।

10. प्रधानमंत्री कार्यालय पर सबसे गंभीर प्रश्न

मैं इस पत्र के सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं।

  • पूर्व कार्यकाल से संबंधित छत्तीसगढ़ लोक आयोग (लोकायुक्त) के अभिलेख उपलब्ध थे;
  • कार्रवाई की अनुशंसा का रिकॉर्ड मौजूद था;
  • नियुक्तियों से संबंधित गंभीर प्रश्न उठे थे;
  • बाद में IGNCA के कार्यकाल में सरकारी ऑडिट ने नियुक्तियों और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कीं;
  • करोड़ों रुपये की धनराशि के संबंध में ऑडिट आपत्तियां सामने आईं;
  • क्षेत्रीय केंद्रों की स्वीकृति एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर प्रश्न उठे;

डॉ. सच्चिदानंद जोशी के इन कृत्यों का संज्ञान केंद्र सरकार को होने के बाद भी प्रधानमंत्री कार्यालय के द्वारा महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त/बनाए रखने का निर्णय किस आधार पर लिया गया? और उससे भी महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री कार्यालय में डॉ. जोशी संबंध में मेरे पूर्व शिकायतों पर कारवाई हेतु क्या क्या कदम उठाए गए ?अगर मेरे पूर्व शिकायत पर अभी तक कोई कारवाई नहीं कि गई है तो इसका स्पष्ट अर्थ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय भी डॉ॰ जोशी के काले कारनामों में सम्मिलित हैं । ऐसी स्थिति में माननीय प्रधानमंत्री जी को भी अपने कार्यालय कि सम्पूर्ण समीक्षा एवं जांच करते हुये भ्रष्टतम आचरण वाले लोगों पर कारवाई चाहिए ।

11. अतः तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित कार्रवाई की जाए

1. डॉ. सच्चिदानंद जोशी को तत्काल प्रभाव से IGNCA के सदस्य-सचिव पद सहित अन्य सभी सरकारी संस्थानों के दायित्वों से बर्खास्त किया जाए ।
2. उनके कार्यकाल से संबंधित सभी मूल एवं इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख तत्काल सुरक्षित/संरक्षित किए जाएं।
3. IGNCA के पिछले दस वर्षों के वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों का स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
4. Director General of Audit (Central Expenditure) की Inspection Report की प्रत्येक आपत्ति पर बिंदुवार Action Taken Report प्रधानमंत्री कार्यालय के स्तर पर मंगाई जाए।
5. छत्तीसगढ़ लोक आयोग की कार्यवाही एवं अनुशंसा पर अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट कराई जाए।
6. डॉ. जोशी की केंद्र सरकार में नियुक्ति/निरंतरता से संबंधित पूरी फाइल की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
7. नियुक्ति के समय किए गए Vigilance verification की जांच कराई जाए।
8. वाराणसी, जम्मू/श्रीनगर, रांची, वडोदरा, गोवा, तिरुवनंतपुरम एवं पुडुचेरी सहित सभी क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना, बजट, नियुक्तियों एवं व्यय की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
9. वाराणसी के गांधी विद्या संस्थान से संबंधित लगभग ₹60 लाख के कथित व्यय की विशेष वित्तीय जांच कराई जाए।
10. वर्ष 2024-25 में वाराणसी केंद्र की नियुक्तियों की आरक्षण रोस्टर सहित पदवार एवं अभ्यर्थीवार जांच कराई जाए।
11. पिछले दस वर्षों की सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियों एवं पदोन्नतियों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।
12. डॉ. जोशी की नियुक्ति/निरंतरता में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।
13. यदि जांच में किसी व्यक्ति के विरुद्ध अनियमितता, कदाचार, वित्तीय नुकसान अथवा नियम उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय, वित्तीय तथा आवश्यकतानुसार आपराधिक कार्रवाई की जाए और सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित की जाए।
14. प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा मेरे पूर्व पत्र पर अब तक की गई कार्रवाई तथा इस पत्र के बाद कि गई कार्रवाई की समयबद्ध लिखित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

यह मामला अब केवल एक अधिकारी को पद से हटाने का मामला नहीं है। यह प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रशासनिक निगरानी, नियुक्ति प्रक्रिया की शुचिता और सरकारी संस्थानों में जवाबदेही की विश्वसनीयता का प्रश्न बन चुका है।

यदि किसी व्यक्ति से संबंधित गंभीर लोकायुक्त अभिलेख सरकार के संज्ञान में थे, और बाद में उसी व्यक्ति के कार्यकाल से संबंधित सरकारी ऑडिट में नियुक्तियों एवं वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर आपत्तियां दर्ज हुईं, तो इन दोनों तथ्यों को अलग-अलग करके देखना पर्याप्त नहीं होगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय को अब यह स्पष्ट करना होगा कि उपलब्ध प्रतिकूल अभिलेखों के बावजूद नियुक्ति/निरंतरता कैसे हुई, किस स्तर पर सत्यापन हुआ और किस आधार पर संबंधित व्यक्ति को महत्वपूर्ण सार्वजनिक दायित्वों में बनाए रखा गया। सरकारी संस्थानों में पद किसी व्यक्ति को जांच से ऊपर नहीं करता। सार्वजनिक पद सार्वजनिक विश्वास की जिम्मेदारी है।

राजद सांसद का पहला पत्र: सांसद सुधाकर सिंह ने लिखा PM मोदी को पत्र: विधिक कार्रवाई की अनुशंसा के बाद भी डॉ. सच्चिदानंद जोशी को कैसे मिला ऊंचा पद?

सपा विधायक का पत्र: चर्चित विधायक ने पीएम मोदी को लिखा पत्र,IGNCA के सदस्य-सचिव सच्चिदानंद जोशी को पद से हटाने की मांग

प्रो. आनंद कुमार का पत्र: सिटिज़न्स फॉर डेमोक्रेसी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र: सच्चिदानंद जोशी को भारतीय विरासत संस्थान के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने का विरोध किया

रामजी लाल सुमन का पत्र: रामजी लाल सुमन ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, IGNCA के सदस्य सचिव डॉ. सचिदानंद जोशी को लेकर उठाए गंभीर सवाल