Ganga Expressway Flood: उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के बीच गंगा एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा पानी में डूबा नजर आया। टोल प्लाजा के आसपास भी जलभराव की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग मजेदार कमेंट करने के साथ-साथ एक्सप्रेसवे की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

टोल प्लाजा के आसपास जमा हुआ पानी
भारी बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा और उसके आसपास पानी भर गया। वायरल वीडियो में सड़क के दोनों तरफ पानी नजर आ रहा है। कुछ जगहों पर पानी इतना ज्यादा है कि एक्सप्रेसवे का हिस्सा तालाब जैसा दिखाई दे रहा है। टोल बूथ के आसपास भी जलभराव की स्थिति देखने को मिली।

सोशल मीडिया पर लोगों ने लिए मजे
पानी से डूबे एक्सप्रेसवे का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे लेकर मजेदार प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा- “टोल टैक्स दो, फ्री में तैराकी करो…” वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये की लागत से बने एक्सप्रेसवे पर बारिश के पानी की निकासी का बेहतर इंतजाम क्यों नहीं किया गया।

क्या जल निकासी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल?
गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट में बारिश के पानी की निकासी बेहद अहम होती है। जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि पानी जमा होने की वजह क्या रही। क्या आसपास की नालियां और ड्रेनेज सिस्टम पर्याप्त हैं या फिर भारी बारिश के कारण अचानक पानी का दबाव बढ़ गया?

पहले भी बारिश में सामने आए थे सवाल
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे से जुड़ी समस्याओं की तस्वीरें पहले भी सामने आती रही हैं। अब टोल प्लाजा के आसपास पानी भरने का वीडियो वायरल होने के बाद एक्सप्रेसवे की मजबूती, निर्माण और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।

594 किलोमीटर लंबा है गंगा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर लंबा है। यह उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल है और कई जिलों को आपस में जोड़ता है। इस एक्सप्रेसवे से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से प्रयागराज तक सफर का समय कम होने की उम्मीद है।

ऐसे में इतनी बड़ी परियोजना के किसी हिस्से में जलभराव की तस्वीरें सामने आना लोगों का ध्यान खींच रहा है। हालांकि, सिर्फ वायरल वीडियो के आधार पर पूरे एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। जलभराव की असली वजह और इसे दूर करने के लिए प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।