नई दिल्ली: चुनावी वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के महासचिव एमए बेबी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग की है।

एमए बेबी ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया अब वोटरों को सूची से हटाने की कवायद बन गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को तुरंत रोका जाना चाहिए और सभी राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद ही आगे का फैसला लिया जाना चाहिए।

'SIR बन गया Special Intensive Removal'

CPI(M) नेता ने कहा कि SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है, लेकिन मौजूदा स्थिति में यह Special Intensive Removal जैसा दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं।

बेबी ने दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर भी इस प्रक्रिया को लेकर मतभेद सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में फैसले बहुमत या सर्वसम्मति से होने चाहिए, लेकिन कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की राय को नजरअंदाज किया गया।

चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज

वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि उसके सभी आदेश संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी किए जाते हैं।

आयोग ने कहा कि बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में आंतरिक चर्चा, टिप्पणियां और सुझाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। ECI ने यह भी कहा कि हाल के बड़े फैसले और मतदाता सूची से जुड़े सुधार आयोग के सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं।

विपक्ष पहले भी उठा चुका है मुद्दा

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दल पहले भी कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अप्रैल 2026 में बताया था कि विपक्ष के कई राज्यसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए प्रस्ताव दिया था। हालांकि, लोकसभा और राज्यसभा में यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

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