Delhi News: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा मतदाता पंजीकरण के संबंध में जारी प्रेस नोट के बाद भारतीय निर्वाचन आयोग पर "बेशर्मी" का आरोप लगाया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में लिखा- ज्ञानेश कुमार की बेशर्मी की कोई सीमा नहीं है।
प्रेस नोट के बाद कसा तंज
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेंश ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर तंज कसते हुए "बेशर्मी" का आरोप लगाया है। यह विवाद पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा वोटर नामांकन को लेकर जारी किए गए एक कथित आधिकारिक प्रेस नोट के बाद शुरू हुआ। जयराम रमेश ने इसे सोशल मीडिया पर साझा करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों में कथित तौर पर भाजपा को फायदा पहुंचाने के बाद अब चुनाव आयोग द्वारा यह प्रेस नोट जारी किया गया है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट भी किया है। उन्होंने विधानसभा चुनाव में खुलेआम धांधली करके भाजपा को जीत दिलाने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के जारी प्रेस नोट को लेकर यह कहा।
प्रेस नोट में क्या?
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ऑफिस से 12 अक्टूबर को एक प्रेस नोट जारी किया गया। जिसमें भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों की व्याख्या की गई। निर्देशों के मुताबिक पश्चिम बंगाल के 24 जिला निर्वाचन अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक सक्रिय अभियान शुरू किया।
इसके साथ ही यह भी कहा कि कोई भी वोटर मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। इस नोट में आगे लिखा है कि राज्य में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। अगर किसी व्यक्ति को शिकायत है तो वह संबंधित बीएलओ, एयरो, ईआरओ या डीईओ से संपर्क कर सकता है।
मतदाता सूची से अवैध तरीके से हटा दिए नाम
कांग्रेस सहित INDI गठबंधन के दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया के जरिए देश के लाखों वैध मतदाताओं, विशेषकर विपक्ष के समर्थक और युवा वोटरों के नाम मतदाता सूची से अवैध तरीके से हटा दिए गए हैं। विपक्ष ने इसे "वोटों की चोरी" करार दिया है।
यह विवाद पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा वोटर नामांकन को लेकर जारी किए गए एक कथित आधिकारिक प्रेस नोट के बाद शुरू हुआ। जयराम रमेश ने इसे सोशल मीडिया पर साझा करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों में कथित तौर पर भाजपा को फायदा पहुँचाने के बाद अब चुनाव आयोग द्वारा यह प्रेस नोट जारी किया गया है
अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर
गौरतलब है कि रजिस्ट्री ने याचिकाकर्ताओं से जवाब भी मांगा गया है। जिसमें निजी पक्षकारों - मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और 2 चुनाव आयुक्तों, एसएस संधू और विवेक जोशी को रिट याचिका में प्रतिवादी के रूप में क्यों शामिल किया गया है। यह आपत्ति संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका के संदर्भ में उठाई गई है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि वे SIR के दौरान चुनाव आयोग की शक्तियों के प्रयोग में कथित अनियमितताओं को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर रहे हैं। उन्होंने अन्य राहतों के साथ-साथ मतदाता सूची संशोधन से संबंधित निर्णयों को लेने और लागू करने के तरीके की जांच की मांग की है।
पूर्व में इस मुद्दे को दी थी चुनौती
जयराम रमेश ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि वह प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने संविधान की भावना के साथ विश्वासघात किया है। इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव आयोग के इस फैसले और कार्यप्रणाली को पहले ही चुनौती दे चुके हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को पद से निलंबित करने के अंतरिम आदेश से फिलहाल इनकार कर दिया था, लेकिन केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से इस मामले में जवाब मांगा है
चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज पर सवाल उठाए
12 अक्टूबर को अधिसूचित अपनी आपत्तियों में याचिकाकर्ताओं से लिस्टिंग प्रोफार्मा में प्रतिवादी का नाम, पृष्ठ 9 पर प्रतिवादियों के विवरण और प्रार्थना में प्रतिवादी संख्या को सही करने की बात कही गई। 12 अक्टूबर को दायर याचिका में अनुच्छेद 32 का हवाला दिया गया। एसआईआर, फॉर्म 6 के संशोधन, ईसीआईएनईटी और ईआरओनेट के कामकाज और जिस प्रक्रिया से मतदाताओं को हटाने या बहाल करने के लिए भी चिह्नित किया गया था।
उसके संबंध में चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज पर सवाल उठाए गए थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश के 11 अक्टूबर के लिखित पत्र के बाद याचिका दायर की गई। जिसमें बताया गया था कि इसी तरह के मुद्दों से जुड़े मामलों की सुनवाई 13 अक्तूबर यानी आड को होनी है और याचिकाकर्ता 12 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से या ई-फाइलिंग के माध्यम से अपनी याचिका दाखिल कर सकते हैं।
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