आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण का स्वागत किया है, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि चुनाव आयोग के बयान के बाद SIR को लेकर पैदा हुई कई गलतफहमियां दूर हो गई हैं।

ECI के स्पष्टीकरण से SIR को लेकर उठ रहे सवाल और आशंकाएं हुईं दूर- नायडू

नायडू ने कहा कि मुख्य  चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों एस. एस. संधू तथा विवेक जोशी के नेतृत्व में आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण ने संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को स्पष्ट किया है, उनके मुताबिक, इससे SIR को लेकर उठाई जा रही कई आशंकाओं पर भी स्थिति साफ हुई है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखें दल- नायडू

मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR से संबंधित निर्णय चुनाव आयोग के संस्थागत नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत सामूहिक रूप से लिए जाते हैं, उन्होंने राजनीतिक दलों से लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे को बनाए रखने की अपील भी की।

नायडू ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना उचित नहीं है, उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव परिणाम जनता के फैसले को दर्शाते हैं और लोकतंत्र में राजनीतिक दलों तथा नेताओं को जीत और हार, दोनों को समान गरिमा के साथ स्वीकार करना चाहिए।

संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखने की अपील

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है, उनके अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास कायम रखना सभी राजनीतिक दलों और उनके नेताओं की जिम्मेदारी है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग ने SIR और मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 को लेकर सामने आई चर्चाओं तथा आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों पर स्पष्टीकरण जारी किया है।

ECI ने कहा है कि SIR से संबंधित फैसले पूर्ण आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं। आयोग ने आंतरिक मतभेद की खबरों को भी खारिज किया। फॉर्म-6 को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया कि मौजूदा फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, SIR प्रक्रिया के तहत इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया है।

SIR को लेकर ECI ने लिए कई फैसले

चुनाव आयोग ने SIR के दौरान नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए प्रक्रिया में कुछ बदलावों की जानकारी दी है। 26 सितंबर को हुई आयोग की बैठक में तय किया गया कि अनमैप्ड और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी से जुड़े मामलों में नोटिस पाने वाले मतदाताओं को सामान्य परिस्थितियों में सुनवाई के लिए ERO या AERO कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी।

आयोग के अनुसार, ऐसे मामलों में बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO संबंधित मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज एकत्र कर सकते हैं। इन दस्तावेजों को ECIनेट पर अपलोड किया जाएगा, जिसके बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ERO उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेंगे।

ऑनलाइन प्रक्रिया को दी जाएगी प्राथमिकता- ECI

ECI ने कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में भी ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि सुनवाई आवश्यक होती है तो मतदाता अपनी ओर से परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अधिकृत कर सकता है।

आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यकतानुसार हेल्प डेस्क स्थापित करने और विशेष शिविर लगाने के निर्देश भी दिए हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीबों, बेघर नागरिकों और अन्य जरूरतमंद मतदाताओं को प्रक्रिया में सहायता उपलब्ध कराना है।

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कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट को इस पूरे मामले का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने युवा मतदाताओं के नामांकन को बढ़ावा देने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने और सोशल मीडिया के जरिए उनका प्रचार करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने फॉर्म-6 को लेकर भी आपत्ति जताई। जयराम रमेश का आरोप है कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले इस फॉर्म में किया गया बदलाव कानूनी रूप से उचित नहीं है और चुनाव आयोग को इसमें इस तरह एकतरफा परिवर्तन करने का अधिकार नहीं है।

इस तरह SIR को लेकर एक ओर चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया और फैसलों को लेकर स्पष्टीकरण दिया है, वहीं विपक्षी दलों ने आयोग की कार्यप्रणाली और फॉर्म-6 से जुड़े मुद्दों पर सवाल कायम रखे हैं।