नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक भारत को ‘ड्रग्स फ्री’ बनाने का व्यापक रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि ड्रग्स का अवैध कारोबार न केवल आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद करता है, बल्कि इससे मिलने वाले ‘गंदे पैसे’ का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने में भी किया जाता है।
अमित शाह ने कहा कि आज ‘नार्को-टेरर’ पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी समस्या बन चुका है। उन्होंने बताया कि 2019 से केंद्र सरकार ने नशे के नेटवर्क को खत्म करने, उसकी वित्तीय कड़ियों को तोड़ने और नशे की गिरफ्त में आए लोगों के पुनर्वास के लिए कई स्तरों पर काम किया है।

2019 से राष्ट्रीय अभियान के रूप में लड़ाई
शाह के मुताबिक, 2014 से पहले नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई अलग-अलग एजेंसियों और इकाइयों तक सीमित थी। 2019 के बाद इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा प्रमुख मुद्दा बनाया गया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाकर इसे एक व्यापक अभियान का रूप दिया गया। सरकार ने 2019 में चार स्तरीय Narco Coordination Centre (NCORD) तंत्र स्थापित किया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन का मॉडल साझा किया गया और केंद्रीय एजेंसियों, राज्यों तथा केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के लिए Joint Coordination Committee बनाई गई।

छोटे पैकेट से बड़े नेटवर्क तक होगी जांच
गृह मंत्री ने बताया कि जांच में ‘Bottom-to-Top’ और ‘Top-to-Bottom’ रणनीति अपनाई जा रही है। यानी अगर कहीं ड्रग्स का छोटा पैकेट भी पकड़ा जाता है तो जांच उसके पूरे नेटवर्क और स्रोत तक पहुंचने की कोशिश करेगी। वहीं, सीमा पर बड़ी खेप पकड़े जाने पर उसके अंतिम गंतव्य और नीचे तक जुड़े नेटवर्क का पता लगाया जाएगा। नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के लिए NIDAN पोर्टल बनाया गया है। वहीं CCTNS और डेटा फ्यूजन के जरिए ड्रग्स के हॉटस्पॉट, तस्करी के तौर-तरीकों और जब्ती का राष्ट्रीय स्तर पर डेटा तैयार किया गया है।

डार्कनेट और क्रिप्टो नेटवर्क पर भी नजर
शाह ने बताया कि ड्रग्स नेटवर्क की वित्तीय जांच पर विशेष जोर दिया गया है। डार्कनेट, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, क्रिप्टो पेमेंट और ‘डेड-ड्रॉप’ डिलीवरी जैसे तरीकों से होने वाली तस्करी पर कार्रवाई के लिए टास्क फोर्स के तहत Darknet-Crypto Cell बनाया गया है।
इसके अलावा प्रीकर्सर केमिकल्स, सिंथेटिक ड्रग्स और दवाओं के अवैध डायवर्जन से जुड़े मामलों के लिए अंतर-मंत्रालयी तंत्र भी स्थापित किया गया है।

36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण
अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी आंकड़े साझा किए। उन्होंने कहा कि 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़ों का सफल प्रत्यर्पण कराया गया। इनमें आर्थिक अपराध, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और गैंगवार से जुड़े आरोपी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 401 Red Corner Notices की प्रक्रिया पूरी की गई और जुलाई 2026 तक इसी साल 182 Red Corner Notices जारी करने की पूरी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
भगोड़ों की तलाश और प्रत्यर्पण के लिए ‘Bharat-Pol’ सिस्टम बनाया गया है, जिससे 14 से अधिक केंद्रीय एजेंसियां और सभी राज्यों की पुलिस जुड़ी हुई हैं। शाह के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच भगोड़ों की करीब 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां सील की गई हैं।

जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट की स्थिति पर भी बोले शाह
गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की भावना में काफी कमी आई है और आतंकवाद के आंकड़े लगातार घटे हैं।
उन्होंने दावा किया कि पांच दशक पुरानी नक्सल समस्या अब खत्म होने की दिशा में है। वहीं नॉर्थ-ईस्ट में करीब 10 हजार युवाओं के हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने और सरकार द्वारा 14 से अधिक समझौते किए जाने का भी उल्लेख किया।

नए आपराधिक कानूनों से बढ़ी दोषसिद्धि दर
अमित शाह ने नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद गोवा पुलिस के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि गोवा में दोषसिद्धि दर 22 प्रतिशत से बढ़कर 53.2 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने साइबर अपराध से निपटने के लिए 1930 हेल्पलाइन को भी अहम बताया और कहा कि नए आपराधिक कानूनों को पुलिस स्टेशन स्तर तक लागू करने की दिशा में राज्यों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।