Tejashwi Yadav on Bihar flood: बिहार में गंगा और अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। नदी किनारे बसे दियारा क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। RJD नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को राज्य में बिगड़ती बाढ़ की स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से प्रभावित लोगों के लिए तत्काल राहत और बचाव अभियान तेज करने की मांग की।
दियारा इलाके पूरी तरह जलमग्न
तेजस्वी यादव ने कहा कि गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कई दियारा इलाके पूरी तरह डूब गए हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और छतों पर फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री, सुरक्षित शेल्टर कैंप और तत्काल बचाव सहायता की जरूरत है।
आगे उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनके जान-माल की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि वह डिजास्टर मैनेजमेंट टीमों के लगातार संपर्क में हैं और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों की व्यवस्था को लेकर बातचीत की जा रही है।
केंद्र से स्पेशल पैकेज की मांग
तेजस्वी यादव ने बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से राज्य के लिए विशेष पैकेज देने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए एयर फोर्स की मदद ली जानी चाहिए, ताकि दूरदराज और जलमग्न क्षेत्रों तक जरूरी सामान जल्द पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में लोगों को भोजन, पानी और सुरक्षित स्थान की जरूरत है और राहत कार्यों में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
सारण में तटबंध में नई दरार से बढ़ी चिंता
छपरा के सारण जिले में माही नदी के तटबंध में नई दरार आने के बाद बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने और तटबंध की मरम्मत में जुटी हैं। सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि दरियापुर ब्लॉक के अकबरपुर पंचायत में माही नदी के तटबंध में करीब 10 से 15 फीट का गैप हुआ है। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की पूरी टीम मौके पर मौजूद है और दरार को जल्द बंद करने के लिए काम किया जा रहा है।
पटना और मनेर में भी बाढ़ का असर
पटना में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने कमजोर और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
मनेर में भी कई पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। अधिकारियों के अनुसार, छह पंचायतें पूरी तरह प्रभावित हुई हैं, जबकि दो पंचायतों में आंशिक असर पड़ा है। प्रभावित लोगों के लिए राहत शेल्टर बनाए गए हैं। गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें जरूरत पड़ने पर नाव के जरिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
राहत कैंप और कम्युनिटी किचन की तैयारी
बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कैंप, कम्युनिटी किचन और मेडिकल सुविधाओं की तैयारी तेज कर दी है। कटिहार में प्रशासन के अनुसार, बाढ़ प्रभावित लोगों को सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत सहायता दी जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि जिन इलाकों में लंबे समय तक खाना पकाना संभव नहीं है, वहां सूखा राशन उपलब्ध कराया जाता है या कम्युनिटी किचन के जरिए भोजन की व्यवस्था की जाती है। प्रभावित परिवारों को प्लास्टिक शीट और खाने-पीने की सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
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गंगा के जलस्तर पर प्रशासन की नजर
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के 6 सितंबर को सुबह 10 बजे के आंकड़ों के मुताबिक, वाराणसी के राजघाट में गंगा का जलस्तर 69.80 मीटर दर्ज किया गया। यहां चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का स्तर 71.262 मीटर है। प्रशासन लगातार नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी बाढ़ की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। सरकार की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और उन्हें आवश्यक भोजन, स्वास्थ्य सुविधा तथा राहत सामग्री उपलब्ध कराना है।