प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी रविवार 27 सितंबर को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सैन्य कार्रवाई ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को दुनिया के सामने स्पष्ट किया था। 28-29 सितंबर 2016 की रात हुई इस कार्रवाई को 10 साल पूरे होने से एक दिन पहले प्रधानमंत्री ने इसे देश के इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया।
पीएम ने ‘मन की बात’ को लेकर कही ये बात
कार्यक्रम की शुरुआत में पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से देश के नागरिकों के सकारात्मक प्रयासों और भारत की उपलब्धियों को सामने लाने का प्रयास किया जाता है। इसी क्रम में उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए 2016 की उस रात को याद किया, जब भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा के पार जाकर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में कहा, "...10 वर्ष पहले 28-29 सितंबर, 2016 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। LOC के उस पार जाकर हमारे वीर जवानों ने जिस तरह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की थी, वो देख दुनिया हैरान… pic.twitter.com/fabLoE6oNT
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 27, 2026
सर्जिकल स्ट्राइक ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को किया स्पष्ट-पीएम
पीएम ने भारतीय जवानों की इस कार्रवाई ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को एक स्पष्ट संदेश के रूप में पेश किया, उन्होंने कहा कि लंबे समय से आतंकवादी हमलों का सामना कर रहे देश के लिए सर्जिकल स्ट्राइक एक कड़ी प्रतिक्रिया थी।
पीएम मोदी ने बीते वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई का उल्लेख करते हुए बालाकोट एयर स्ट्राइक और हाल के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों के जरिए भारत ने यह संदेश दिया है कि देश पर आतंकवादी हमला होने की स्थिति में जवाब दिया जाएगा।
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26/11 हमले का भी किया जिक्र
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने देश में हुए पुराने आतंकी हमलों को याद करते हुए सितंबर 2008 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस हमले में कई निर्दोष लोगों की जान गई थी और इसके कुछ ही समय बाद मुंबई में 26/11 का बड़ा आतंकी हमला हुआ।
पीएम मोदी ने कहा कि पहले आतंकवादी घटनाओं के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठती थी, लेकिन कई बार इस दिशा में तत्काल कदम नहीं उठाए जाते थे। उनके अनुसार, अब भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है और सरकार इसके प्रभावों को परिणामों के रूप में देख रही है।