चिकन को हाई-प्रोटीन फूड माना जाता है। इसमें प्रोटीन के साथ विटामिन B12, जिंक और सेलेनियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन अगर कोई व्यक्ति एक महीने तक सिर्फ चिकन खाए और फल, सब्जियां, अनाज, दालें और अन्य खाद्य पदार्थों को पूरी तरह छोड़ दे, तो डाइट का न्यूट्रिशन बैलेंस बिगड़ सकता है।

प्रोटीन ज्यादा मिलने से क्या होगा?

चिकन में मौजूद प्रोटीन मसल्स की मरम्मत और ग्रोथ में मदद करता है। अगर किसी व्यक्ति की डाइट में पहले प्रोटीन की कमी थी, तो चिकन शामिल करने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है और बार-बार भूख लगने की समस्या कम हो सकती है।

ग्रिल्ड, बॉइल्ड या कम तेल में पका चिकन हेल्दी विकल्प माना जाता है। हालांकि, फ्राइड चिकन या ज्यादा तेल, बटर और क्रीम वाली ग्रेवी के साथ खाने पर कैलोरी और सैचुरेटेड फैट की मात्रा बढ़ सकती है।

कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की कमी

सिर्फ चिकन खाने से शरीर को पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट नहीं मिलेंगे। कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत हैं। इनकी मात्रा बहुत कम होने पर कुछ लोगों को थकान, कमजोरी या लो एनर्जी महसूस हो सकती है।

चिकन में डाइटरी फाइबर नहीं होता। फाइबर फल, सब्जियों, होल ग्रेन्स, बींस और दालों से मिलता है। इसकी कमी से कब्ज और पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है।

वजन कम होगा या बढ़ सकता है?

अगर चिकन खाने से कुल कैलोरी का सेवन कम हो जाता है, तो वजन घट सकता है। लेकिन इसका कारण मुख्य रूप से कैलोरी डेफिसिट होगा, सिर्फ चिकन खाना नहीं। वहीं, डीप-फ्राइड चिकन या हाई-कैलोरी सॉस के साथ खाने पर वजन बढ़ भी सकता है।

बैलेंस्ड डाइट क्यों जरूरी है?

सिर्फ चिकन खाने से विटामिन C, फोलेट, फाइबर और कई प्लांट-बेस्ड एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी हो सकती है। इसलिए चिकन को डाइट का हिस्सा बनाना ठीक है, लेकिन पूरी डाइट को केवल चिकन तक सीमित करना संतुलित तरीका नहीं है।

Disclaimer: किसी बीमारी, एलर्जी या खास फिटनेस गोल के कारण हाई-प्रोटीन डाइट लेने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर है।

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