Benefits of Chanting OM: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव बेहद आम बात हो गया है। ऐसे में लोग मानसिक शांति के लिए योग और एक्सरसाइज का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सनातन धर्म में सदियों से मौजूद ओम का जाप आपको एक स्वस्थ जीवन दे सकता है? वहीं अब आधुनिक विज्ञान और मेडिकल रिसर्च के मुताबिक सुबह उठकर ओम का जाप करने से होने वाले शारीरिक और मानसिक लाभों की पुष्टि कर रहे हैं।

सिर्फ 10 से 15 मिनट करें ओम का उच्चारण

अक्सर सुबह का समय अध्यात्म और साधना के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यदि आप रोज सुबह उठकर सिर्फ 10 से 15 मिनट ओम का उच्चारण करते हैं, तो यह आपके पूरे शरीर को भीतर से रिचार्ज कर देता है। आइए जानते हैं कि ओम का जाप करने से आपकी सेहत को क्या-क्या फायदे मिलते हैं।

तनाव और बेचैनी में राहत

ओम का जाप करते समय व्यक्ति धीमी और नियंत्रित सांस लेता है तथा लंबे समय तक ध्वनि का उच्चारण करता है। इससे ध्यान सांस और आवाज पर केंद्रित होता है, जिससे मन को भटकाने वाले विचारों से कुछ समय के लिए दूरी बनाने में मदद मिल सकती है। नियमित ध्यान और श्वास अभ्यास तनाव की अनुभूति कम करने में उपयोगी हो सकते हैं।

सांस और शरीर पर सकारात्मक असर

ओम का उच्चारण गहरी सांस लेने और धीरे-धीरे सांस छोड़ने के साथ किया जाता है। यह प्रक्रिया धीमी श्वास का अभ्यास बन सकती है, जिससे शरीर को रिलैक्स करने में मदद मिलती है। लंबे 'म' उच्चारण के दौरान चेहरे और गले में कंपन भी महसूस होता है, जो कई लोगों को शांत अनुभव देता है।

एकाग्रता बढ़ाने में मदद

जाप के दौरान लगातार एक ही ध्वनि पर ध्यान केंद्रित करने से माइंडफुलनेस का अभ्यास होता है। विद्यार्थियों और कामकाजी लोगों के लिए यह कुछ समय के लिए मानसिक एकाग्रता विकसित करने का सरल तरीका हो सकता है।

नींद के लिए भी उपयोगी

तनाव और अत्यधिक विचारों के कारण नींद प्रभावित हो सकती है। नियमित ध्यान और रिलैक्सेशन अभ्यास सोने से पहले मन को शांत करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, केवल ओम का जाप अनिद्रा का स्थायी इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

मानसिक तनाव से मिलती है परमानेंट राहत

आज के समय में तनाव सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं बनकर उभरी हैं. जब आप सुबह शांत मन से बैठकर ओम का उच्चारण करते हैं, तो इससे निकलने वाली ध्वनि तरंगे आपके मस्तिष्क को शांत करती हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ओम का जाप करने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर तेजी से कम होता है. यह ध्वनि हमारे दिमाग के नर्वस सिस्टम को संतुलित करती है, जिससे अचानक आने वाले गुस्से, घबराहट और मानसिक अस्थिरता पर पूरी तरह लगाम लगती है.

दिल और फेफड़े रहते हैं तंदुरुस्त

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, जब हम ओम शब्द के 'म' भाग का लंबा उच्चारण करते हैं, तो हमारे सिर और गले में एक गहरी कंपन पैदा होती है. यह कंपन हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण तंत्रिका यानी वेगस नर्व को एक्टिव कर देती है. वेगस नर्व सीधे हमारे हृदय, फेफड़ों और पाचन तंत्र को नियंत्रित करती है. इसके एक्टिव होने से दिल की धड़कन सामान्य होती है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है.

ऑक्सीजन लेवल में सुधार

ओम का सही तरीके से उच्चारण करने के लिए गहरी सांस लेनी पड़ती है और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए ध्वनि निकाली जाती है. यह प्रक्रिया एक बेहतरीन ब्रीदिंग एक्सरसाइज की तरह काम करती है. इससे हमारे फेफड़ों की ऑक्सीजन सोखने की क्षमता काफी बढ़ जाती है. सुबह के समय ताजी हवा में इसका अभ्यास करने से शरीर से जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है और फेफड़े मज़बूत होते हैं, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।

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