Entertainment News: आज है स्वर कोकिला और भारत रत्न लता मंगेशकर जी का जन्मदिन। उनका जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर के मध्य प्रदेश में हुआ था। लता मंगेशकर का मूल नाम हेमा मंगेशकर था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक शास्त्रीय गायक और नाट्य कलाकार थे। लता मंगेशकर के कई उपनाम भी थे। उन्हें 'स्वर कोकिला', 'स्वर साम्राज्ञी' और 'नाइन्टेंगल ऑफ इंडिया' (Nightingale of India) जैसे नामों से भी जाना जाता है। साल 1942 में लता मंगेशकर ने अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने 7 दशक से अधिक लंबे करियर में 30 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए। लता मंगेशकर का 6 फरवरी 2022 को मुंबई में निधन हो गया था।


36 से ज्यादा भाषाओं में गाया गाना

भारतीय संगीत मंगेशकर वो दिग्गज हस्ती हैं जो एक बड़ी लीजेंड्री सिंगर के तौर पर अलग पहचान बना चुकी है। करीब 8 दशक के फिल्मी करियर में लता मंगेशकर ने 36 से ज्यादा भाषाओं में गाने गाकर अपना जादू बिखेर चुकी है। लता मंगेशकर के लिए कहा जाता है वह जब भी रिकॉर्डिंग रूम में जाती थी तो अपनी चप्पले बाहर निकाल देती थी।

क्योंकि लता मंगेशकर रिकॉर्डिग रूम को मंदिर का दर्जा देती थी। लता मंगेशकर कभी भी अपने परफेक्शन के बावजदू रिलीज के बाद अपना गाना नहीं सुनती थी। इसे लेकर उनका मानना था कि अगर वह ऐसा करेंगी तो अपनी गलतियां खूद ही निकालेंगी।

मिल चुके हैं कई बड़े अवॉर्ड

तला मंगेशकर को साल 2001 में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया है। साल 1999 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। साल 1969 में उन्हें पद्म भूषण और साल 1989 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

2009 में उन्हें फ्रांस ने देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, नेशनल ऑर्डर ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर का अधिकारी भी बनाया। लता मंगेशकर ने अपना पहला गाना 1942 में गाया था उस समय उनके सिर से पिता का साया उठ चुका था। जिस समय उनके पिता का निधन हुआ था तब वह 13 साल की थी।

लता मंगेशकर ने अभिनय से की थी अपने सफल की शुरुआत

नवयुग चित्रपट मूवी कंपनी के मालिक और मंगेशकर परिवार के बेहद करीबी दोस्त मास्टर विनायक ने उनकी देखभाल की। उन्होंने लता की मदद अभिनेत्री और सिंगर बनने में की थी। विनायक ने 13 साल की लता मंगेशकर को एक मराठी फिल्म किती हसाल में नाचू या गाडे, खेलु सारी मानी हौस भारी गीत गाया था।

लेकिन फिल्म के आखिर में इसे हटा दिया था। लता मंगेशकर ने हिंदी फिल्म गजभाऊ के लिए माता एक सपूत की दुनिया बदल दे तू गाना गाया था। क्योंकि लता मंगेशकर को बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपना कदम मजबूती से जमाना था इसलिए उन्होंने अभिनय के काम को भी गायिकी के साथ जारी रखा।

जह देने की भी कोशिश हुई

लता मंगेशकर के लिए गुलजार ने गाना लिखा। मेरी आवाज ही पहचान है, नाम गुम जाएगा जैसे टाइटल आज भी लोग गुनगुनाते है। जब लता मंगेशकर 32 साल की हुई थी, उस दौरान उन्हें स्लो प्वॉइजन दिया गया था। लता मंगेशकर की बेहद करीबी पदमा सचदेवा ने इसका जिक्र अपनी किताब में किया है। राइटर मजरूह सुल्तानपुरी काफी दिनों तक उनके घर आते थे। हालांकि इसके पीछे की सच्चाई का खुलासा नहीं हो पाया था। और आज भी यह सवाल केवल सवाल ही बनकर रह गया।

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