मनोरंजन
सुरों की मलिका आशा भोसले का 92 वर्ष की उम्र में निधन, संगीत के एक युग का अंत
दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन। मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की वजह से मुंबई के अस्पताल में ली अंतिम सांस। दादर में होगा अंतिम संस्कार!
भारतीय संगीत के स्वर्ण युग की एक और चमकती लौ हमेशा के लिए बुझ गई है। सुरीली आवाज और जादुई अंदाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं और मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर सुनते ही न केवल बॉलीवुड, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। आठ दशकों तक अपनी आवाज से फिल्म इंडस्ट्री को सींचने वाली आशा ताई का जाना संगीत के एक अध्याय का अंत है।
मल्टीपल ऑर्गन फेलियर बना मौत का कारण
अस्पताल के सूत्रों और भाजपा नेता आशीष शेलार ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि बढ़ती उम्र और लंबे समय से चल रही बीमारी के कारण उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था (मल्टीपल ऑर्गन फेलियर), जिसके चलते उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कुछ समय पहले उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी। खबर है कि आज शाम 4 बजे दादर के शिवाजी पार्क श्मशान भूमि में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
आठ दशकों का सफर और 12 हजार से ज्यादा गाने
आशा भोसले का करियर किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने लगभग 82 वर्षों तक संगीत की दुनिया को अपनी सेवाएं दीं और 12,000 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज से अमर कर दिया। 'दम मारो दम' से लेकर 'इन आंखों की मस्ती' तक, उनकी आवाज में वह विविधता थी जो शास्त्रीय संगीत से लेकर पॉप और कैबरे तक हर विधा में फिट बैठती थी। उन्होंने न केवल हिंदी बल्कि कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया, जिसके लिए उन्हें दादा साहब फाल्के और पद्म विभूषण जैसे सम्मानों से नवाजा गया।
संघर्षों से भरा जीवन और बड़ी बहन का साथ
आशा जी का जीवन संघर्ष और सफलता की एक अद्भुत मिसाल रहा। दिग्गज गायक दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और सुर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन होने के नाते, संगीत उनके खून में था। कम उम्र में पिता के साये से महरूम होने के बाद उन्होंने अपनी बड़ी बहन के साथ मिलकर परिवार का बोझ उठाया। हालांकि, जीवन के मोड़ पर उन्हें कई निजी मुश्किलों और घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। लता दीदी के साथ उनकी खट्टी-मीठी नोकझोंक और फिर उनका गहरा प्यार हमेशा चर्चा में रहा।
कला जगत को लगा एक बड़ा झटका
बीता साल कला जगत के लिए पहले ही कठिन रहा था और अब 2026 में आशा भोसले के निधन ने भारतीय संस्कृति को एक ऐसा घाव दिया है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं है। उनकी कमी हर उस महफिल में महसूस की जाएगी जहाँ संगीत की बात होगी। आज भले ही वह हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके गाए हुए हजारों सदाबहार नगमे हमेशा हमारी यादों में गूंजते रहेंगे। सुरों की यह साधिका अपनी जादुई आवाज के जरिए युगों-युगों तक जीवित रहेगी।
Written by: Anushka Sagar
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