युवाओं की तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) में सेवा फर्स्ट राष्ट्रीय यूथ इनोवेशन चैलेंज की शुरुआत की गई है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने DTU परिसर में इस 100 दिन के इनोवेशन चैलेंज का शुभारंभ किया।
इस चैलेंज के तहत युवाओं को रोजमर्रा की समस्याओं के लिए नए और उपयोगी समाधान तैयार करने का मौका मिलेगा। इसके लिए कुल 2 करोड़ रुपये का पुरस्कार पूल रखा गया है। पहल का उद्देश्य केवल नए आइडिया जुटाना नहीं, बल्कि उन्हें प्रोटोटाइप में बदलकर वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने योग्य बनाना है।
आइडिया से लेकर प्रोटोटाइप तक मिलेगा मार्गदर्शन
सेवा फर्स्ट चैलेंज में प्रतिभागियों को समस्या की पहचान करने, समाधान तैयार करने, प्रोटोटाइप बनाने और उसकी उपयोगिता जांचने तक की पूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा। चयनित प्रतिभागियों को विशेषज्ञों की सलाह और मेंटरशिप भी उपलब्ध कराई जाएगी।
चैलेंज के अंतिम चरण में तैयार किए गए प्रोटोटाइप का प्रदर्शन और मूल्यांकन किया जाएगा। DTU के अनुसार, इस पहल का फोकस आइडिया से लेकर उसके प्रभाव तक की पूरी यात्रा को पूरा करना है।
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किन क्षेत्रों में कर सकेंगे इनोवेशन?
इस राष्ट्रीय स्तर के चैलेंज में युवाओं के लिए कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें कृषि और ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कचरा प्रबंधन, ऊर्जा, पर्यावरण, शहरी समस्याएं और परिवहन जैसे विषय शामिल हैं।
इसके अलावा AI, रोबोटिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, स्मार्ट मोबिलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी नए समाधान विकसित किए जा सकते हैं। स्थानीय स्तर की समस्याओं को पहचानकर उनके लिए तकनीकी समाधान तैयार करने का अवसर भी मिलेगा।
स्टूडेंट से लेकर स्टार्टअप तक ले सकेंगे हिस्सा
इस चैलेंज में स्कूल, ITI, डिप्लोमा, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और PhD स्तर के छात्र भाग ले सकते हैं। इसके साथ ही स्टार्टअप, MSME, रिसर्च संस्थान और सरकारी लैब भी निर्धारित श्रेणियों के तहत हिस्सा ले सकेंगे।
प्रतिभागी अकेले या टीम के रूप में आवेदन कर सकते हैं। DTU को इस पहल के लिए नॉर्दर्न रीजन का कोऑर्डिनेशन सेंटर बनाया गया है, जिसमें दिल्ली के साथ हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और लद्दाख शामिल हैं।
गांवों की समस्याओं पर भी काम करेंगे इंजीनियरिंग छात्र
कार्यक्रम के दौरान DTU ने रूरल टेक्नोलॉजी एंड कम्युनिटी इंगेजमेंट प्रोग्राम की भी घोषणा की। इसके तहत 2027-28 शैक्षणिक सत्र से इंजीनियरिंग छात्रों को गांवों में भेजने की योजना है।
छात्र ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को समझकर तकनीक की मदद से उनके समाधान तैयार करेंगे। इस पहल का उद्देश्य इंजीनियरिंग, उद्यमिता और सामाजिक विकास को जोड़ना है, ताकि ग्रामीण जरूरतों के लिए व्यावहारिक और प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकें।
सेवा फर्स्ट चैलेंज में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार के साथ इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और स्टार्टअप विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी मिलेगा।