मुंबई: भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में दूसरी छमाही में 7 प्रतिशत से नीचे जा सकती है, लेकिन पूरे वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था करीब 7.2 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि भारत की दीर्घकालिक संभावित विकास दर करीब 8 प्रतिशत है और आने वाले वर्षों में देश इस स्तर को हासिल कर सकता है।

सबनवीस ने कहा कि वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 7.5 से 7.6 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही थी। हालांकि, वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में विकास दर 7 प्रतिशत से नीचे आने की संभावना है।

दूसरी छमाही में धीमी पड़ सकती है ग्रोथ

मदन सबनवीस के मुताबिक, दूसरी तिमाही में ग्रोथ को कुछ हद तक नए GDP सीरीज के तहत हुए समायोजनों से बने बेस का फायदा मिल सकता है। लेकिन तीसरी और चौथी तिमाही में यह प्रभाव कम हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि मानसून और खपत में संभावित कमजोरी का असर दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। ऐसे में पूरे वित्त वर्ष की औसत विकास दर करीब 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

8% तक पहुंच सकती है भारत की संभावित विकास दर

सबनवीस ने भारत की लंबी अवधि की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक रुख जताया। उन्होंने कहा कि भारत की संभावित विकास दर 8 प्रतिशत है और उम्मीद है कि देश वित्त वर्ष 2027-28 में इस स्तर के करीब पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर 2027-28 में यह स्तर हासिल नहीं होता है, तो 2028-29 तक भारत की विकास दर 8 प्रतिशत से ऊपर रहने की संभावना है। हालांकि, इसका समय वैश्विक आर्थिक माहौल, कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और टैरिफ जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

बॉन्ड मार्केट में जारी रह सकती है अस्थिरता

वैश्विक बॉन्ड बाजारों पर अगले करीब छह महीने तक अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशक अलग-अलग बाजारों में मिलने वाले रिटर्न और अमेरिका से जुड़े आर्थिक घटनाक्रम पर नजर रखेंगे।

उन्होंने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब 5.2-5.3 प्रतिशत, जबकि भारतीय बॉन्ड यील्ड करीब 7.2 प्रतिशत के आसपास है। हालांकि, सिर्फ दोनों देशों की यील्ड के अंतर से निवेश का रुख तय नहीं होता। रुपये में संभावित गिरावट और अन्य आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

महंगाई का बॉन्ड यील्ड पर असर

चीन और अमेरिका के बॉन्ड यील्ड में अंतर का जिक्र करते हुए सबनवीस ने कहा कि चीन में बॉन्ड यील्ड 2 प्रतिशत से नीचे, जबकि अमेरिका में यह करीब 5.3 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग बाजारों की तुलना करते समय केवल केंद्रीय बैंक की ब्याज दर को देखना पर्याप्त नहीं है। महंगाई की स्थिति भी बॉन्ड यील्ड को प्रभावित करने वाला अहम कारक है।

कुल मिलाकर, भारत की अर्थव्यवस्था को निकट अवधि में घरेलू और वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन मजबूत बुनियादी परिस्थितियों के चलते आने वाले वर्षों में देश के 8 प्रतिशत या उससे अधिक की आर्थिक वृद्धि दर की ओर बढ़ने की उम्मीद बनी हुई है।

यह भी पढ़ें: