Home and Car Loan EMI Hike: यदि आपने होम लोन या कार लोन ले रखा है या नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आने वाले दिन आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं। लगातार स्थिर चल रही ब्याज दरों के बाद अब एक बार फिर रेपो रेट में बढ़ोतरी की आहट सुनाई दे रही है। हालांकि विश्लेषकों की माने तो, RBI आगामी Monetary Policy Review बैठकों में ब्याज दरों में इजाफा कर सकता है, जिससे सीधे तौर पर आपकी EMI बढ़ जाएगी।
क्यों बढ़ सकती है रेपो रेट?
1. एक रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी देखी गई है। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। इस कारण महंगाई दर लगातार उच्च स्तर पर बनी रह सकती है।
2. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू रही हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने से देश में महंगाई दर और ज्यादा भड़कने का खतरा है।
3. अल नीनो के कारण मानसून पर असर और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे खाद्य महंगाई दर में उछाल आ सकता है।
4. अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed) द्वारा ब्याज दरों में 0.25-0.25 प्रतिशत की संभावित बढ़ोतरी के चलते भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दरों का अंतर कम हो सकता है। पूंजी प्रवाह को बनाए रखने के लिए आरबीआई को भी दरों में बढ़ोतरी का कदम उठाना पड़ सकता है।
प्रमुख ब्रोकरेज और बैंकों के बड़े अनुमान
डॉयचे बैंक: जर्मनी की इस ब्रोकरेज कंपनी ने अपना अनुमान बदलते हुए कहा है कि आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में रेपो रेट में 0.25-0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है। बैंक का मानना है कि दर वृद्धि का यह सिलसिला अगले साल के मध्य तक चल सकता है, जिससे कुल बढ़ोतरी 1 प्रतिशत तक हो सकती है।
भारतीय स्टेट बैंक: देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि खुदरा महंगाई 6.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इस स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई का अक्टूबर और दिसंबर में 0.25-0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करना एक सही कदम होगा।
एचएसबीसी: विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने भी मुहर लगाई है कि महंगाई लगातार नौ महीनों तक 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है, जिसके कारण अक्टूबर और दिसंबर में नीतिगत दरें बढ़ाई जाना लगभग तय है।
आपकी EMI और जेब पर क्या होगा असर?
जब रिजर्व बैंक बैंकों को दिए जाने वाले short term loan की दर यानी रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर आम ग्राहकों पर पड़ता है।
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रेपो रेट में बढ़ोतरी होते ही बैंक अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लैंडिंग रेट और रेपो-लिंक्ड लैंडिंग रेट में इजाफा करेंगे। यदि रेपो रेट में कुल 0.50% की बढ़ोतरी होती है, तो आपके फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और कार लोन की मासिक ईएमआई बढ़ जाएगी या फिर लोन की अवधि लंबी हो जाएगी।