US-Iran War: ईरान के बयान ने एक बार फिर दुनिया में टेंशन बढ़ा दी है। अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मज उनके नियंत्रण में है, लेकिन अब ईरान की तरफ से एक बयान जारी कर दिया गया है। जिसमे ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी 7 शर्तें नहीं मानी जाएंगी तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा।

कई देशों के ऑयल टैंकर इसी रास्ते से होकर गुजरते है। जिसके बाद सवाल उठना शुरू हो गया है कि क्या एक बार फिर दुनिया भर में एनर्जी संकट गहराने वाला है? कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है।

क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हो गया बंद?

सरकारी मीडिया ने रविवार को ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ़ के हवाले से बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) तब तक नहीं खुलेगा जब तक कि जून में अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते में तय की गई ईरान की सात शर्तें पूरी नहीं हो जातीं।

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसके तहत शर्तें पूरी होने पर होर्मुज के रास्ते को सात दिनों के भीतर फिर से खोला जा सकता है और समुद्री आवाजाही सामान्य की जा सकती है। माना जा रहा है कि ईरान ने यह ऐलान करके अमेरिका को सीधे तौर पर चुनौती दे दी है।

ईरान के बयान से दुनिया में हलचल तेज

गौरतलब है कि दुनिया का 40 प्रतिशत कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही होकर गुजरता है। इसके अलावा एलपीजी, एलएनजी जैसी जरूरी गैस भी इस रास्ते से होकर अन्य देशों तक पहुंचती है। होर्मुज बंद होने के बाद जहाज फंस जाएंगे और सप्लाई पूरी तरह से बाधित हो जाएगी। इसका असर यह होगा कि देशों में एनर्जी संकट गहराने लगेगा। दुनिया में आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से बंद हो जाता है तो भारत में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। क्योंकि बड़ी मात्रा में भारत में होर्मुज से ही कच्चा तेल और एलपीजी गैस आती है। हालांकि इंडिया दूसरे देशों से भी इनकी सप्लाई लगातार ले रहा है।

अगर ज्यादा दिनों तक स्थिति ऐसी ही रहती है तो देशभर में खुदरा महंगाई के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ सकते है। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों में भी बढ़ोतरी संभव है। हालांकि सरकार का कहना है कि उनके पास उपयुक्त मात्रा मे कच्चे तेल और एलपीजी का स्टोक है।