Trump Tariff Relief: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। भारत समेत कई देशों पर भारी शुल्क लगाने की धमकी के बीच अब अमेरिकी प्रशासन कुछ खास दवाओं और उनके अवयवों को टैरिफ से राहत देने की तैयारी में है। इस फैसले का फायदा भारत की दवा कंपनियों को भी मिल सकता है।
अमेरिका ने दवाओं पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की बात कही थी। हालांकि, इसका असर सिर्फ दूसरे देशों से आने वाले सामान पर ही नहीं पड़ता, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। दवाओं के दाम बढ़ने से अमेरिका में मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका रहती है।
भारत समेत 20 देशों को मिल सकती है राहत
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका भारत समेत करीब 20 देशों से आयात होने वाली कुछ विशेष दवाओं और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अवयवों पर शून्य प्रतिशत मूल्यानुसार शुल्क (Ad Valorem Tariff) की व्यवस्था करने जा रहा है।
मूल्यानुसार शुल्क का मतलब किसी वस्तु के मूल्य के आधार पर तय किया जाने वाला शुल्क है। यानी वस्तु की कीमत का एक निश्चित प्रतिशत टैक्स के रूप में लिया जाता है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने इन देशों की सूची फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित की है। विभाग की ओर से कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे जुड़े घटकों पर 100 फीसदी शुल्क लगाने की तैयारी की गई है। हालांकि, सूची में शामिल कुछ खास श्रेणी के उत्पादों को इससे छूट दी जा रही है।
अमेरिका क्यों दे रहा है दवाओं को टैरिफ से छूट?
अमेरिकी प्रशासन का जोर घरेलू स्तर पर दवाओं का उत्पादन बढ़ाने पर है। ट्रंप ने 2 अप्रैल को पेटेंट वाली दवाओं, बायोलॉजिक्स और उनसे जुड़े अवयवों के आयात पर शुल्क लगाने को लेकर एक घोषणापत्र जारी किया था। इसके पीछे मकसद अमेरिका में दवा उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना बताया गया है। लेकिन कुछ ऐसी दवाएं हैं जिनकी सप्लाई दूसरे देशों से होती है और जिनका इस्तेमाल गंभीर या दुर्लभ बीमारियों के इलाज में किया जाता है। इन्हीं को लेकर टैरिफ में राहत की व्यवस्था की जा रही है।
किन दवाओं को मिलेगी शून्य शुल्क की सुविधा?
दुर्लभ बीमारियों के इलाज की दवाएं
बांझपन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं
सेल थेरेपी
जीन थेरेपी
एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (ADC)
पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली दवाएं
इन दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले संबंधित अवयव
इसका मतलब है कि भारत से अमेरिका जाने वाले पात्र उत्पादों और उनके संबंधित अवयवों पर इन श्रेणियों में अतिरिक्त शुल्क का बोझ कम हो सकता है।
भारत के अलावा इन देशों को भी राहत
भारत के साथ अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। नोटिस के मुताबिक, इन देशों से आने वाले पात्र उत्पादों को शून्य प्रतिशत शुल्क का लाभ इसलिए मिल सकता है क्योंकि अमेरिका के साथ उनका मौजूदा व्यापार एवं सुरक्षा ढांचा समझौता है या भविष्य में ऐसा समझौता होने की संभावना है।
जेनेरिक दवाओं पर क्या होगा असर?
अमेरिकी वाणिज्य विभाग के नोटिस के अनुसार, जेनेरिक दवाएं और उनसे जुड़े अवयव धारा 232 के तहत लगाए जाने वाले दवा शुल्क के दायरे में नहीं आते हैं। कुछ नामित कंपनियों के लिए शुल्क व्यवस्था 31 जुलाई से प्रभावी हो चुकी है, जबकि अन्य संबंधित कंपनियों और उत्पादों पर नई व्यवस्था 29 सितंबर से लागू होने वाली है। भारत दुनिया के प्रमुख जेनेरिक दवा आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ नीति में दवाओं को लेकर किया गया यह बदलाव भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।