नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल की सप्लाई को लेकर अपने फैसले का बचाव किया है। उन्होंने साफ कहा कि रूस से आने वाला डीजल सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के बाजारों के लिए है। उनका दावा है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले को लेकर अमेरिका में ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं।
रूस से कितने डीजल की सप्लाई होगी?
ट्रंप ने 9 अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद डीजल सप्लाई को लेकर समझौते की घोषणा की थी। इसके तहत रूस से शुरुआत में 3 लाख टन से ज्यादा डीजल भेजने की बात कही गई है। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और आगे 10 लाख टन डीजल की सप्लाई का प्रस्ताव है।
इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने रूसी डीजल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट भी दी है। यह छूट अप्रैल 2027 तक के लिए है।
आखिर ट्रंप को क्यों लेना पड़ा यह फैसला?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की कीमतों में तेजी और ईंधन की सप्लाई में आई दिक्कतों के बीच अमेरिका पर कीमतें नियंत्रित करने का दबाव है। डीजल का इस्तेमाल ट्रकों, खेती से जुड़े कामों और कई औद्योगिक गतिविधियों में होता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से माल ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका असर दूसरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ता है।
ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अतिरिक्त डीजल पहुंचने से सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
रूस को भी होगा फायदा
इस फैसले का फायदा रूस को भी मिल सकता है। डीजल की बिक्री से रूस को कमाई होगी, जिसका इस्तेमाल उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा देने में हो सकता है। यूक्रेन के साथ जारी युद्ध के बीच रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाला राजस्व एक अहम मुद्दा बना हुआ है।
इसी वजह से अमेरिका के कुछ सांसदों ने इस समझौते का विरोध किया है। उनका तर्क है कि रूसी ऊर्जा उत्पादों पर प्रतिबंधों में छूट देने से रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है और यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर दबाव कम हो सकता है।
क्या इससे दुनिया में सस्ता होगा डीजल?
रूसी डीजल की सप्लाई बढ़ने से बाजार को कुछ राहत मिलने की संभावना है, लेकिन कीमतों में बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें सप्लाई, मांग, युद्ध, परिवहन और रिफाइनरियों की स्थिति जैसे कई कारकों पर निर्भर करती हैं।
विशेषज्ञों ने भी सवाल उठाया है कि घोषित मात्रा इतनी बड़ी नहीं है कि इससे वैश्विक डीजल बाजार में बहुत बड़ा बदलाव आ जाए।
फिलहाल, ट्रंप का कहना है कि रूसी डीजल की सप्लाई का मकसद दुनिया के बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना है। लेकिन इस फैसले से रूस को होने वाले आर्थिक फायदे और प्रतिबंधों में दी गई छूट को लेकर विवाद जारी है।