नई दिल्ली: पूरे विश्व के लिए जलवायु परिवर्तन एक गंभीर समस्या बन गई है। बेमौसम बरसात, अत्यधिक गर्मी एवं विभिन्न प्राकृतिक व मानव निर्मित आपदाओं ने पृथ्वी का संतुलन बिगाड़ दिया है। इन्हीं कारणों से विश्वभर में प्रति वर्ष फसलों के खराब होने से भुखमरी की समस्या एवं बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं, जिसकी वजह से लोगों की अकाल मौत हो रही है और विश्व में मृत्यु दर भी बढ़ गया है।

'सुपर अल निनो' के कारण दुनियाभर में होगी 4.51 लाख लोगों की मौत

इस संदर्भ में जलवायु वैज्ञानिकों ने अगले छह महीने में भीषण गर्मी की वजह से अत्यधिक लोगों के मौतों का अनुमान लगाया है। शिकागो विश्वविद्यालय के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के एक नए अध्ययन के अनुसार, 'सुपर अल निनो' की वजह से अगले छह महीने में सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भीषण गर्मी पड़ने वाली है। जिसके कारण दुनियाभर में तकरीबन 4 लाख 51 हजार लोगों की मौतें होने की संभावना जताई जा रही है। इन आंकड़ों में भारत भी शामिल है, जहां 'सुपर अल निनो' की वजह से लगभग 15,800 अतिरिक्त मौतें होने संभावना बताई जा रही है।

सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक बढ़ जाएगा तापमान

शिकागो विश्वविद्यालय के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के इस अध्ययन में कहा गया है कि 'सुपर अल निनो' की वजह से वैश्विक भूमि का तापमान सामान्य से करीब 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा। जिससे सामान्य वर्षों की तुलना में 44 प्रतिशत अत्यधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। दरअसल, जलवायु परिवर्तन की यह स्थिति जो अगले 20 साल बाद आने वाली थी, वह 'सुपर अल निनो' की वजह इसी वर्ष आ रही है। इसे लेकर दुनियाभर के जलवायु वैज्ञानिक चिंतित हैं।

भारत में होगी 15,800 अतिरिक्त मौतें

भारत में अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर से फरवरी के बीच करीबन 15,800 अतिरिक्त मौतें होने संभावना बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि ये मौतें गर्मी के मौसम में और भी बढ़ सकती हैं। शिकागो विश्वविद्यालय के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के इस अध्ययन के अनुसार, इसके अलावा अफ्रीका के साहेल क्षेत्र (नाइजीरिया, सूडान, नाइजर, चाड) में 66,800, नाइजीरिया में 31,400, इंडोनेशिया में 19,300, दक्षिण-पूर्व एशिया (फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड कंबोडिया) में 19,400, ब्राजील में 13,300 अतिरिक्त मौतें होने की संभावना जताई जा रही है।

'सुपर अल निनो' से बचाव के उपाय

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि 'सुपर अल निनो' से अपनी जान बचाने के लिए लोगों को गर्मी से बच कर रहना पड़ेगा और भीषण गर्मी के कारण तबीयत बिगड़ते ही अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सलाह लेना जरूरी है। इसके साथ ही गर्मी की चेतावनी, कमजोर वर्गों तक स्वास्थ्य सेवाएं , कूलिंग सेंटर व हाइड्रेशन स्टेशन बनाने, श्रमिकों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने जैसे उपायों पर जोर दिया जाना चाहिए।

ये भी पढ़ें-यमुना एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा! स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत