नई दिल्ली: कनाडा के फ्रेंच भाषी प्रांत क्यूबेक में अलगाववादी पार्टी पार्टी क्यूबेक्वा (Parti Québécois-PQ) ने प्रांतीय चुनाव में जीत हासिल कर ली है। पार्टी के नेता पॉल सेंट-पियरे प्लामोंडॉन अब क्यूबेक के अगले प्रीमियर होंगे। हालांकि, PQ को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। पार्टी ने 127 सदस्यीय नेशनल असेंबली में 59 सीटें जीती हैं, जबकि बहुमत के लिए 64 सीटों की जरूरत है।
क्यूबेक की आजादी पर फिर तेज हुई बहस
इस जीत के साथ क्यूबेक के कनाडा से अलग होने की बहस एक बार फिर तेज हो गई है। प्लामोंडॉन पहले ही क्यूबेक की स्वतंत्रता को लेकर जनमत संग्रह कराने का वादा कर चुके हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पद पर रहने तक ऐसा कोई जनमत संग्रह नहीं कराया जाएगा। यानी कम से कम 2029 से पहले इसकी संभावना नहीं है।
1980 और 1995 में भी हो चुका है जनमत संग्रह
क्यूबेक में इससे पहले 1980 और 1995 में भी कनाडा से अलग होने को लेकर जनमत संग्रह हो चुका है। दोनों बार अलगाववादियों को हार मिली थी। खासकर 1995 का मुकाबला बेहद करीबी रहा था, जब करीब 50.58 फीसदी मतदाताओं ने कनाडा के साथ बने रहने के पक्ष में मतदान किया था। मौजूदा सर्वेक्षणों में भी क्यूबेक की स्वतंत्रता के समर्थन में करीब 30 फीसदी लोग ही हैं।
मार्क कार्नी के सामने क्यों बढ़ी चुनौती?
इस चुनावी नतीजे को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के लिए भी चुनौती माना जा रहा है। कार्नी अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के बीच कनाडा की एकता पर जोर दे रहे हैं। अब उन्हें ऐसे प्रांतीय नेता के साथ काम करना होगा, जो क्यूबेक को कनाडा से अलग करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। कार्नी ने हालांकि प्लामोंडॉन को जीत की बधाई दी है और कहा है कि मजबूत क्यूबेक, मजबूत कनाडा बनाने के मिशन का हिस्सा है।
सिर्फ अलगाववाद नहीं, इन मुद्दों ने भी बदला चुनावी गणित
PQ की जीत के पीछे सिर्फ अलगाववाद का मुद्दा नहीं माना जा रहा। विश्लेषकों के मुताबिक, मतदाताओं में 2018 से सत्ता में रही Coalition Avenir Québec (CAQ) सरकार के प्रति नाराजगी और महंगाई समेत कई घरेलू मुद्दों को लेकर असंतोष भी रहा। PQ को करीब 28 फीसदी वोट मिले, लेकिन विपक्षी दलों के बीच वोट बंटने से वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
अब अल्बर्टा पर भी टिकी नजर
क्यूबेक के बाद अब कनाडा के दूसरे प्रांत अल्बर्टा पर भी नजरें हैं। वहां 19 अक्टूबर को कनाडा से अलग होने की प्रक्रिया शुरू करने को लेकर गैर-बाध्यकारी वोट होना है। ऐसे में क्यूबेक का नतीजा कनाडा की राष्ट्रीय एकता के लिए आने वाले समय में एक अहम राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
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