United Nations: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान की जमकर धज्जियां उड़ा दी। भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने कश्मीर और भारत में अल्पसंख्यकों पर पाकिस्तान को करारा जबाव दिया है। उन्होंने इस्लामाबाद द्वारा जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जे की आलोचना करते हुए उन क्षेत्रों को खाली करने की मांग की।

परिषद में पाकिस्तान को भारतीय राजनयिक क्षितिज ने सलाह देते हुए कहा कि वह पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह दूसरों की ज़मीन पर कब्ज़ा करने या आतंकवाद फैलाने के बजाय अपने लोगों के विकास पर ध्यान दे, क्योंकि न तो ये हरकतें और न ही काउंसिल में किए गए उसके ड्रामे, उन कर्ज़ों को चुकाने में मदद करेंगे जिन पर उसकी अर्थव्यवस्था टिकी है।

जम्मू और कश्मीर भारत का अंग था है और रहेगा

क्षितिज त्यागी ने कहा कि, पाकिस्तान को याद दिलाना पड़ता है कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, जो हमेशा भारत का ही रहेगा। जम्मू और कश्मीर का एकमात्र हिस्सा जो विदेशी कब्जे में है, वह पाकिस्तान का है, जिसे हम एक बार फिर खाली करने का आह्वान करते हैं। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है और हमारे अल्पसंख्यक मतदान भी करते हैं। उनके लिए भी कानून एक जैसे बने हैं।

मुस्लिम आबादी के लोग सर्वोच्च न्यायालय में बैठते हैं और हमारी संस्थाओं का नेतृत्व करते हैं। पाकिस्तान में, स्वतंत्रता के बाद से हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों की संख्या में भारी कमी आई है। उनकी बेटियों का अपहरण किया जाता है, जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है और उनकी शादी करा दी जाती है।


1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए जुर्म को लेकर न दे स्पष्टीकरण

ईशनिंदा कानून (Blasphemy Law) हर अल्पसंख्यक परिवार पर खतरे की तरह मंडरा रहा है। मुस्लिम अल्पसंख्यक, शिया, अहमदी, इस्माइली और हजारा, व्यवस्थित उत्पीड़न का सामना करते हैं और उनके पूजा स्थलों पर हमले और अपवित्रता फैलाई जाती है। दोहरे मापदंड को उजागर कर क्षितिज त्यागी ने परिषद से पाकिस्तान का सख्त लहजे में कहा कि वह अपना स्पष्टीकरण न दे कि साल 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ क्या हुआ था।

कश्मीरी पंड़ितों को पाकिस्तान द्वारा सशस्त्र, प्रशिक्षित और सीमा पार भेजे गए आतंकवादियों ने घरों से बेदखल किया था। उन्हीं आतंकवादियों ने कश्मीर में हर धर्म के लोगों की हत्या की है। जिनमें मुसलमान भी शामिल थे। जिस राज्य ने उन्हें संरक्षण दिया, वही अब इस परिषद से जांच की मांग कर रहा है। इस परिषद को इस विडंबना का एहसास जरूर होगा।

क्या बोले विदेश मंत्रायल के प्रवक्ता जायसवाल

इसी बीच, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सिंधु जल संधि पर मध्यस्थता न्यायालय के फैसले के संबंध में पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजे गए पत्र को कड़ा खंडन भी किया। इस पत्र में अंतरराष्ट्रीय कानूनी तंत्रों को तोड़ने-मरोड़ने के लिए इस्लामाबाद की निंदा की गई थी। पाकिस्तान के बोले गए झूठ का खुलासा कर जायसवाल ने यह भी कहा कि, स्थायी न्यायालय या तथाकथित 'स्थायी मध्यस्थता न्यायालय' के बारे में मैं पाकिस्तान से कहना चाहूंगा कि वह अपने दुर्भावनापूर्ण प्रचार के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने और झूठ फैलाने की आदत से बाज आ जाए।

भारत के सैद्धांतिक और अडिग कानूनी रुख को दोहराते जायसवाल ने कहा कि, पाकिस्तान मंत्री द्वारा पेश किया गया फैसला स्थायी मध्यस्थता न्यायालय का नहीं है। यह एक अवैध रूप से गठित न्यायालय का फैसला है। हम इसे पाकिस्तान द्वारा वास्तविकता को विकृत करने का एक और प्रयास मानते हैं। इस मुद्दे पर हमारा रुख बहुत स्पष्ट है और हमने इसे कई बार दोहराया है। 

 

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