India-US Trade Deal: अमेरिका और भारत के बीच होने वाली डील को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि बीते कई महीनों से ये चर्चाएं जारी है। कई बार अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आ चुके है। आसान भाषा में कहे तो कई दौर की बातचीत बेनतीजा निकली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जेमिसन ग्रीर ने डील को लेकर अहम टिप्पणी की है।

जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है कि क्या भारत-यूएस ट्रेड डील बीच मझधार में फंस गया है। वहीं इसी बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी शिकागो इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के पहुंचे थे। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

India-US Trade Deal पर लगा ग्रहण!

बता दें कि भारत अमेरिका के बीच होने वाले ट्रेड डील पर अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने कहा, 'भारत-अमेरिका ट्रेड डील अभी 'तुरंत होने वाली' नहीं है। अपने संबोधन में जेमिसन ग्रीर ने कहा कि "मंत्री गोयल और मेरी बातचीत बहुत अच्छी और काम की रही। हमारे स्टाफ़ अभी मिल रहे हैं क्योंकि वे यहीं देश में हैं और यहीं काम करते हैं।

हम लगातार भारत के साथ ट्रेड डील को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। जैसा कि हम अमेरिका में कहते हैं, हम इस डील को पूरा करने के बिल्कुल आखिरी चरण में हैं। कल सुबह अमेरिका के समय के हिसाब से कल सुबह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच भी बहुत अच्छी और काम की बातचीत हुई थी।' गौरतलब है कि यह डील भारत के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकती है।

जी20 ट्रेड मिनिस्टर्स की मीटिंग पर पीयूष गोयल ने दी जानकारी

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि TheICAI के लीडर्स और शिकागो, मिशिगन और ओहियो चैप्टर के सदस्यों के साथ एक दिलचस्प बातचीत हुई। भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी में बढ़ते मौकों पर चर्चा हुई। साथ ही, इस बात पर ज़ोर दिया गया कि भारत की आर्थिक रफ़्तार – जिसमें रिकॉर्ड FDI निवेश और मज़बूत GDP ग्रोथ शामिल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के एक आत्मविश्वास से भरे, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के विज़न को दर्शाती है। इस साझेदारी को मज़बूत करने में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की अहम भूमिका है। वे व्यवसायों को सीमा-पार टैक्स, नियमों का पालन और वित्तीय गवर्नेंस से जुड़े मामलों में मदद करते हैं, और साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक पूंजी के लिए निवेश के लायक बनाते हैं। वहीं अब देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देशों के बीच कब डील होगी।