अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कूटनीतिक प्रयास तेज होते नजर आ रहे हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर ठोस प्रगति करता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन प्रतिबंधों में कुछ राहत देने और ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने पर विचार कर सकता है।
अधिकारी ने सीएनएन से बातचीत में बताया कि मध्यस्थों के माध्यम से दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, अमेरिका की स्थिति यह है कि परमाणु मुद्दे का समाधान किए बिना किसी व्यापक समझौते तक पहुंचना संभव नहीं होगा।
मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी
अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, बातचीत में रचनात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद कई अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। खासतौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उससे जुड़ी प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है।
इस बीच, ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के प्रस्ताव को ट्रंप ने खारिज कर दिया। उन्होंने इसे अमेरिका की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं माना।
इसी सप्ताह आगे बढ़ सकती है बातचीत
ट्रंप ने रविवार को एक्सियोस से बातचीत में संकेत दिया था कि आने वाले दिनों में ईरान के साथ फिर चर्चा हो सकती है। अमेरिकी पक्ष की बातचीत में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
ट्रंप का कहना था कि ईरान समझौते की इच्छा तो जाहिर कर रहा है, लेकिन उसकी मौजूदा शर्तें अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। उनके मुताबिक, ईरान की कुछ मांगें ऐसी हैं, जिन पर अमेरिका संभवतः पहले विचार कर सकता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।
परमाणु मुद्दे पर ईरान के रुख में नरमी के संकेत
अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि ईरान ने परमाणु मुद्दे पर अपने रुख में कुछ लचीलापन दिखाने के संकेत दिए हैं। हालांकि, अभी दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हुए हैं कि प्रस्तावित प्रतिबद्धताओं को किस समय और किस तरीके से लागू किया जाएगा।
बातचीत से यह स्पष्ट है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम दोनों पक्षों के बीच समझौते का केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका किसी अंतिम समझौते से पहले इस क्षेत्र में ठोस और लागू की जा सकने वाली प्रतिबद्धताएं चाहता है।
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ईरान की मंशा को लेकर अमेरिकी पक्ष सतर्क
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने सीएनएन के जेक टैपर से बातचीत में कहा कि ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार नहीं किया क्योंकि अमेरिकी प्रशासन को तेहरान की गंभीरता और उसके इरादों पर पर्याप्त भरोसा नहीं है।
वॉल्ट्ज के अनुसार, अमेरिका इस बात से भी असहमत है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान सभी प्रमुख रियायतों की मांग करे। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि किसी संभावित समझौते में दोनों देशों की ओर से ठोस प्रतिबद्धताएं और कदम शामिल होने चाहिए।