Bangladesh: पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश में भी अल्पसंख्यकों को लेकर चिंता शुरू हो गई है। शेख हसीना सरकार के हटने के बाद से लगातार अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है। इसी बीच बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCUC) ने एक बयान में कहा है कि पुलिस, ड्रोन और राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं की कड़ी सुरक्षा के बीच पूरे देश में शारदीय दुर्गा पूजा समारोह के लिए की गई व्यवस्था "दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण" है।
परिषद ने कहा कि ऐसे हालात अल्पसंख्यक श्रद्धालुओं की धार्मिक स्वतंत्रता को लगातार सीमित कर रहे हैं और साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में बांग्लादेश की छवि को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं।
क्यों बढ़ाई गई सुरक्षा?
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर पहले से चिंताएं सामने आती रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन त्योहार के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
बांग्लादेश के पुलिस प्रमुख ने तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी है। इसमें पूजा से पहले, त्योहार के दौरान और प्रतिमा विसर्जन के बाद तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया है। पुलिस ने अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर भी नजर रखने की बात कही है, क्योंकि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरें सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकती हैं।
नेताओं ने जताई चिंता
दुर्गा पूजा के लिए भारी पुलिस बल और तकनीकी निगरानी की खबरों के बीच धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बहस हो रही है। ऐसी स्थिति में चिंता जताने वाले नेताओं का तर्क है कि किसी भी समुदाय को अपना धार्मिक त्योहार मनाने के लिए सुरक्षित महसूस करना चाहिए।
दूसरी ओर, बांग्लादेश सरकार और सुरक्षा अधिकारियों ने त्योहार को शांतिपूर्ण बनाने के लिए व्यापक इंतजामों की बात कही है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता खैरुल कबीर खोकोन ने 13 अक्टूबर को कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करेंगे और पुलिस तथा पूजा समितियों के साथ समन्वय करेंगे।