Asim Munir: धीरे-धीरे पाकिस्तान कंगाल की राह पर बढ़ चुका है। वर्ल्ड बैंक की अक्टूबर 2026 की रीजनल अपडेट में बताया गया है कि मिडिल ईस्ट, नॉर्थ अफ्रीका, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान क्षेत्र में रोज़ाना 3 डॉलर से कम आय वाली गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले कुल लोगों में से लगभग 48 प्रतिशत पाकिस्तानी हैं।
जबकि बाकी 47 प्रतिशत अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया और यमन में हैं। यानि पाक की करीब आधी आबादी गरीब रेखा से नीचे है। जमीनी स्तर पर तो स्थिति और खराब है। वहीं अब इस मामले में आसिम मुनीर की चर्चा तेजी से हो रही है। आईए आपको बताते है क्या है पूरा मामला
आर्थिक संकट के बीच मुल्ला मुनीर का हाथ!
'यूरोपियन टाइम्स' के एक लेख के अनुसार पाकिस्तान में बिगड़ते आर्थिक संकट के लिए सेना के नेतृत्व द्वारा रक्षा पर लगातार किया जा रहा भारी खर्च ज़िम्मेदार है। FY2026-27 के बजट में रक्षा सेवाओं के लिए 3 ट्रिलियन PKR आवंटित किए गए, जो 17.6 प्रतिशत की वृद्धि है। इसमें हथियारों की खरीद के लिए फिजिकल एसेट्स (भौतिक संपत्तियों) पर खर्च 39.6 प्रतिशत बढ़कर 925.8 बिलियन PKR हो गया।
इस आंकड़े में 822 बिलियन PKR की सैन्य पेंशन और सशस्त्र बल विकास कार्यक्रम के लिए 319 बिलियन PKR शामिल नहीं हैं। विकास पर खर्च नाममात्र के तौर पर लगभग 1 ट्रिलियन PKR पर स्थिर रहा, जो असल में एक बड़ी कटौती है। पिछले बजट में रक्षा खर्च में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई थी।
जबकि कुल संघीय खर्च में सात प्रतिशत की कटौती की गई थी, और यह आवंटन दुनिया के उन देशों में से एक में उच्च शिक्षा, कृषि और जलवायु अनुकूलन पर संयुक्त खर्च से अधिक था, जो जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। लेख में देश की आर्थिक बदहाली के लिए पाकिस्तान के वास्तविक शासक, फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर को ज़िम्मेदार ठहराया गया है।
महंगाई और महंगे ईंधन ने बढ़ाई चिंता
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी है। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र से होने वाले आयात और विदेशी वित्तीय प्रवाह पर काफी निर्भर है। पश्चिम एशिया में लंबे समय तक तनाव रहने से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आयात बिल और महंगाई पर दबाव पड़ने का जोखिम रहता है।
IMF ने मई 2026 की अपनी समीक्षा में भी चेतावनी दी थी कि मध्य पूर्व के संघर्ष से पाकिस्तान की महंगाई, आर्थिक विकास और भुगतान संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।