विदेश
बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच रूस का बयान, कहा-परमाणु शक्ति ही शांति की...
यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के बीच रूस ने परमाणु हथियारों पर बड़ा बयान दिया है। क्रेमलिन के मुताबिक न्यूक्लियर वेपन ही दुनिया को वैश्विक युद्ध से बचा सकते हैं।
रूस ने एक बार फिर परमाणु हथियारों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चुनौतियों के बीच क्रेमलिन का मानना है कि परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Deterrence) ही वर्तमान समय में बड़े युद्धों को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम बनी हुई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव (Dmitry Peskov) ने बुधवार को कहा कि दुनिया की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक कमजोर और अस्थिर होती जा रही है, उनके अनुसार, आज के दौर में परमाणु हथियारों के जरिए बनाए गए संतुलन के अलावा ऐसा कोई मजबूत तंत्र मौजूद नहीं है जो संभावित वैश्विक संघर्षों को रोक सके। पेस्कोव ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में तकनीकी प्रगति के कारण ऐसे उन्नत गैर-परमाणु हथियार विकसित हो सकते हैं जिनकी विनाशकारी क्षमता परमाणु हथियारों के समान हो। हालांकि उन्होंने किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया, लेकिन हाल के समय में अमेरिका की ओर से चीन के बढ़ते परमाणु भंडार और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंताएं लगातार व्यक्त की जाती रही हैं।
यूक्रेन युद्ध के दौरान भी उठ चुका है परमाणु मुद्दा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) यूक्रेन संघर्ष के दौरान कई अवसरों पर परमाणु हथियारों का उल्लेख कर चुके हैं। चार वर्ष से अधिक समय से जारी युद्ध के बीच उनके बयानों पर अमेरिका और यूरोपीय देशों ने आपत्ति दर्ज कराई है। पश्चिमी देशों का आरोप है कि रूस रणनीतिक दबाव बनाने के लिए परमाणु शक्ति का हवाला देता रहा है। वहीं, दूसरी ओर, अमेरिकी राजनीति में परमाणु हथियार नियंत्रण को लेकर नई बहस चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ऐसी नई परमाणु नियंत्रण संधि की आवश्यकता बताई है जिसमें चीन को भी शामिल किया जाए। हालांकि चीन सार्वजनिक रूप से इस विचार से सहमत नहीं दिखा है। रूस का कहना है कि यदि चीन को किसी नए समझौते में शामिल किया जाता है, तो परमाणु क्षमता रखने वाले अमेरिकी सहयोगी देशों जैसे United Kingdom और France को भी उसका हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
न्यू स्टार्ट संधि खत्म होने से बढ़ी चिंताएं
वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियार नियंत्रण को लेकर चिंताएं इसलिए भी बढ़ी हैं क्योंकि रूस और अमेरिका के बीच लागू आखिरी प्रमुख परमाणु समझौता, New START Treaty, फरवरी में समाप्त हो गया। इसके समाप्त होने के बाद दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों पर लागू कई प्रतिबंध और निगरानी व्यवस्थाएं प्रभावहीन हो गई हैं। वर्ष 2010 में हुए इस समझौते के तहत दोनों देशों को अधिकतम 1,550 तैनात परमाणु वॉरहेड रखने की सीमा निर्धारित की गई थी। शीत युद्ध के बाद इसे हथियार नियंत्रण के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में गिना जाता है। हालांकि समय-समय पर रूस और अमेरिका एक-दूसरे पर समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप लगाते रहे। वहीं, अब स्थिति यह है कि कई दशकों में पहली बार दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों की तैनाती को नियंत्रित करने वाली कोई सक्रिय संधि लागू नहीं है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में परमाणु सुरक्षा, हथियार नियंत्रण और संभावित हथियारों की नई दौड़ को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
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