लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक प्रचार का एक नया माध्यम चर्चा में है। BJP और समाजवादी पार्टी के बीच AI से तैयार किए गए वीडियो को लेकर आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं। दोनों दलों का कहना है कि दूसरे पक्ष के नेताओं को निशाना बनाने वाले आपत्तिजनक AI वीडियो उन्होंने तैयार नहीं किए हैं। यह मुद्दा हाल के दिनों में तब ज्यादा चर्चा में आया, जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसे वीडियो दिखाए।

31 अगस्त को पहली बार सामने आया मामला

रिपोर्ट के मुताबिक 31 अगस्त को अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में AI से तैयार वीडियो दिखाया था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे दिखने वाले किरदार को दिखाया गया था। वीडियो में विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले महंगाई, महिला सुरक्षा और राम मंदिर दान से जुड़े आरोपों जैसे मुद्दों को शामिल किया गया था।

अखिलेश ने इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक दूसरा वीडियो भी दिखाया था, जिसमें उनके जैसे दिखने वाले किरदार को अपराध और दंगों जैसे मुद्दों से जोड़कर पेश किया गया था। अखिलेश ने कहा था कि उन्हें यह सामग्री किसी दूसरे स्रोत से मिली थी और उन्होंने वीडियो के सोशल मीडिया स्रोतों की जांच की मांग की थी।

इसके बाद कई वीडियो सामने आए

10 सितंबर को गोरखपुर में नागरिक सुविधाओं के मुद्दे पर बोलते हुए अखिलेश ने एक और AI वीडियो दिखाया। इसमें योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर सांसद रवि किशन जैसे दिखने वाले किरदारों को डांस करते हुए दिखाया गया था। इसके बाद सितंबर के मध्य में एक अन्य वीडियो सामने आया, जिसमें अखिलेश और योगी जैसे दिखने वाले किरदारों के बीच काल्पनिक बातचीत दिखाई गई थी। इसमें सपा के PDA अभियान से जुड़ा संदेश भी था।

19 सितंबर को अखिलेश ने डिजिटल प्रचार को लेकर कहा कि आने वाला चुनाव जमीन के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लड़ा जाएगा। उनका कहना था कि पार्टी को डिजिटल नैरेटिव के मामले में पीछे नहीं रहना चाहिए। सपा नेताओं का दावा है कि ये वीडियो पार्टी द्वारा आधिकारिक रूप से नहीं बनाए जाते, बल्कि कार्यकर्ता और समर्थक इन्हें तैयार करके पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाते हैं।

BJP ने भी वीडियो बनाने से किया इनकार

BJP की ओर से भी कहा गया है कि पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल या किसी पार्टी नेता ने अखिलेश यादव को निशाना बनाने वाला आपत्तिजनक AI वीडियो तैयार या अपलोड नहीं किया। BJP प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि AI तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसके गलत या आपत्तिजनक इस्तेमाल से बचना चाहिए। BJP ने ऐसे कंटेंट को स्वतंत्र सोशल मीडिया क्रिएटर्स से जोड़ते हुए पार्टी से अलग बताया है।

2027 के चुनाव में बढ़ेगा डिजिटल प्रचार?

AI वीडियो का यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। AI तकनीक से किसी पहचानने योग्य चेहरे को काल्पनिक स्थिति और संवाद के साथ वीडियो में दिखाया जा सकता है। इससे राजनीतिक संदेश कम समय में सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकता है।

हालांकि, इन वीडियो को लेकर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं, जबकि दोनों ही दलों ने आपत्तिजनक वीडियो खुद बनाने से इनकार किया है। ऐसे में आने वाले समय में AI से तैयार राजनीतिक सामग्री और उसके स्रोत को लेकर विवाद जारी रहने की संभावना है।

यह भी पढ़ें: रायबरेली से आज निकलेगा अखिलेश का PDA रथ, 2027 से पहले सपा का बड़ा अभियान