UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर अभी औपचारिक बातचीत का इंतजार है। इसी बीच दोनों दलों के कुछ नेताओं के बयानों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। कैराना से सपा सांसद इकरा हसन के बयान के बाद कांग्रेस की ओर से इमरान मसूद और उदित राज ने प्रतिक्रिया दी है।

इकरा हसन ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी का मुकाबला करने के लिए अखिलेश यादव ही सक्षम हैं और कांग्रेस अकेले ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा था कि गठबंधन बना रहता है तो अच्छा है, लेकिन नहीं बनता है तो नुकसान कांग्रेस का होगा।

इमरान मसूद ने दिया जवाब

इकरा हसन के बयान पर सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इकरा हसन भी अकेले यह तय नहीं कर सकतीं। मसूद ने साथ मिलकर आगे बढ़ने की बात कही और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए अतिआत्मविश्वास से बचने की बात कही।इससे पहले भी इमरान मसूद ने यूपी में विपक्षी दलों के बीच तालमेल की जरूरत पर जोर दिया था। मौजूदा बयानबाजी मुख्य रूप से इस बात के इर्द-गिर्द है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों की भूमिका और सीटों का बंटवारा किस तरह होगा।

उदित राज ने 2019 और 2024 का दिया हवाला

कांग्रेस नेता उदित राज ने भी इकरा हसन के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नेता अक्सर अपने नेतृत्व को लेकर बढ़-चढ़कर बातें करते हैं। उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि 2024 में दोनों दलों ने साथ चुनाव लड़ा था और सपा के प्रदर्शन में बड़ा बदलाव देखने को मिला।यहां 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में 37 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। 2019 में सपा ने उत्तर प्रदेश में 5 सीटें जीती थीं।

दोनों दलों के नेताओं को संयम की सलाह

बयानबाजी के बीच कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने नेताओं से संयम बरतने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी से सम्मान की उम्मीद है तो दूसरे का सम्मान भी करना चाहिए।सपा सांसद राजीव राय ने भी इस बात पर सहमति जताई कि नेताओं को बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने यूपी में इंडिया गठबंधन के साथ रहने और अखिलेश यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कही।