लखनऊ: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से अलग-अलग फैसलों पर दर्ज की गई कथित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से खुद इस्तीफा दे देना चाहिए।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। हालांकि चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर सामने आई आपत्तियों को संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बताया है और कहा है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उनका कहना है कि अगर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर बने रहने के बजाय खुद इस्तीफा दे देना चाहिए।

अखिलेश इससे पहले भी चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी या हस्तक्षेप लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। विपक्ष की ओर से SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर भी लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।

10 महीने में 14 आपत्तियों की रिपोर्ट से शुरू हुआ विवाद

CEC को लेकर मौजूदा विवाद की मुख्य वजह द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कई फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की।

रिपोर्ट में बताया गया कि इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने, नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव और चुनावी डेटा से जुड़े मामलों से था। कुछ आपत्तियों में यह सवाल भी उठाया गया कि कुछ फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी या सहमति के बिना लिए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। चुनावी डेटा के प्रबंधन और उसे केंद्रीकृत करने को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों ने चिंता जताई थी। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों में दाखिल अपीलों और गोवा में मतदाता डेटा से जुड़े सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल सामने आए।

Form 6 में बदलाव को लेकर भी सवाल

विवाद का एक अहम हिस्सा नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला Form 6 भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म में SIR से जुड़ा एक अतिरिक्त सवाल जोड़ा गया था। इस बदलाव पर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने कथित तौर पर सवाल उठाया था और कहा था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी हो सकता है। बाद में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस बदलाव को लेकर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों की ओर से चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता डेटा से संबंधित कुछ प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए जाने का उल्लेख है।

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर क्या कहा?

वहीं चुनाव आयोग ने अपने भीतर किसी असामान्य टकराव की बात को स्वीकार नहीं किया है। आयोग के मुताबिक अलग-अलग मुद्दों पर सदस्यों की ओर से विचार या टिप्पणियां देना संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि पिछले 10 महीनों में लिए गए फैसलों को केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग के अनुसार SIR समेत उसके फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

विपक्ष ने तेज की CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग

रिपोर्ट सामने आने के बाद कई विपक्षी दलों और नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने अलग-अलग बयानों में उनके पद पर बने रहने पर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं ने इस्तीफे की मांग की है, जबकि कुछ ने हटाने या जांच की मांग रखी है।

इस पूरे विवाद के बीच मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर उठे सवाल हैं। एक तरफ विपक्ष इन रिपोर्टों को गंभीर मानते हुए CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसले सामूहिक और सर्वसम्मत तरीके से लिए गए हैं। ऐसे में CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी बयानबाजी आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है।

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