बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर तीखा हमला बोला है। एक रिपोर्ट के अनुसार, स्पेशल इंटेंसिव रेगुलेशन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 बार अपनी आपत्ति जताई थी। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहा है।

बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव की मांग

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता ने आरोप लगाया कि 2020 और 2025 के चुनावों में मतदाता सूचियों से नाम हटाने, पैसे बांटने और वोटों की गिनती में गड़बड़ी जैसी संस्थागत धांधली की गई। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष जमीनी स्तर पर नहीं हारा, बल्कि जनादेश चुराया गया है। इसके चलते उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल में नए सिरे से पारदर्शी चुनाव कराने की मांग की।

नियमों में बदलाव और चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

तेजस्वी ने चुनावी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की समय-सीमा को एक साल से घटाकर 45 दिन करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह न्यायिक जांच को रोकने की साजिश है। साथ ही, चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल करने की प्रक्रिया पर भी चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला गया, तो देश में बांग्लादेश जैसी अशांति की स्थिति बन सकती है।

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

विपक्ष के इन आरोपों पर चुनाव आयोग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ECI अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली एक संवैधानिक संस्था है। आयोग के भीतर विचार-विमर्श के दौरान सवाल, लिखित टिप्पणियां या सुझाव उठना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाना होता है। वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके सभी फैसलों और आदेशों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त है।

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