केरल: केरल में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के प्रस्ताव को लेकर सियासत तेज हो गई है। CPI(M) नेता और केरल के पूर्व वित्त मंत्री केएन बालगोपाल ने दावा किया है कि इस प्रस्ताव को सबसे पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने रखा था। बाद में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF सरकार ने इसे आधिकारिक सरकारी प्रस्ताव के रूप में पेश करने का फैसला किया।
बालगोपाल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब केरल विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव में चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में बदलाव की मांग भी की गई है।
बालगोपाल ने क्या कहा?
CPI(M) नेता केएन बालगोपाल के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से जुड़ा प्रस्ताव मूल रूप से विपक्ष के नेता पिनराई विजयन की ओर से पेश किया गया था। उन्होंने कहा कि आवेदन मिलने के बाद UDF सरकार ने इसे सरकारी प्रस्ताव के रूप में अपनाकर विधानसभा में पेश किया।
हालांकि, विधानसभा में प्रस्ताव मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने पेश किया था। इसे कुछ संशोधनों के साथ पारित किया गया। प्रस्ताव के खिलाफ बीजेपी के तीन सदस्यों ने विरोध जताया।
प्रस्ताव में चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए गए?
केरल विधानसभा में पारित प्रस्ताव में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई। इसमें आशंका व्यक्त की गई कि तकनीकी गड़बड़ियों और अनियमितताओं के कारण वंचित समुदायों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी मजदूरों और युवा मतदाताओं के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं, बीजेपी विधायक वी. मुरलीधरन ने संशोधन के दौरान कहा कि संबंधित मीडिया रिपोर्ट को चुनाव आयोग ने गलत बताया है। उन्होंने संवैधानिक संस्था की छवि खराब करने की कोशिशों की निंदा करने वाला वाक्य भी प्रस्ताव में जोड़ने का सुझाव दिया।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति समिति में बदलाव की मांग
प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति के पुनर्गठन की मांग भी की गई है। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश को समिति में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया।
मौजूदा व्यवस्था में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री की ओर से नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री चयन समिति का हिस्सा होते हैं। केरल विधानसभा के प्रस्ताव में मुख्य न्यायाधीश को समिति में शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाए गए।
क्या विधानसभा के प्रस्ताव से CEC को हटाया जा सकता है?
केरल विधानसभा का प्रस्ताव राजनीतिक और संवैधानिक बहस का हिस्सा है, लेकिन इससे मुख्य चुनाव आयुक्त को सीधे पद से नहीं हटाया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी है। इसके लिए संसद में निर्धारित विशेष बहुमत के साथ प्रस्ताव पारित होना जरूरी है।