Nepal Flash Flood: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के रसुवा इलाके में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का सैलाब आया और देखते ही देखते सड़कें, पुल, इमारतें और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट इसकी चपेट में आ गए। इस आपदा में करीब 163 लोगों की मौत और 1000 से अधिक लोगों के लापता होने की बात सामने आई है। कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सुबह इलाके में भारी बारिश की कोई खबर नहीं थी, तो अचानक इतना भयावह सैलाब आया कैसे? आइए, पूरी घटना को आसान भाषा में स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं।

1. पहले लगा भूकंप आया है
बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटका महसूस किया गया। शुरुआत में अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे यानी USGS ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया। लेकिन बाद में स्थिति साफ हुई। यह सामान्य भूकंप नहीं था। दरअसल, पहाड़ से हुआ एक बेहद शक्तिशाली लैंडस्लाइड इतना बड़ा था कि उससे करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका पैदा हुआ। यानी जिस झटके को शुरुआत में भूकंप समझा गया, उसकी असली वजह पहाड़ का खिसकना था।

2. पहाड़ का मलबा नदी में गिरा
लैंडस्लाइड के दौरान ऊंचाई वाले इलाके से बर्फ, चट्टान और भारी मलबा खिसककर ल्हेंडे खोला नदी में जा गिरा। ल्हेंडे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। यह नदी चीन के इलाके से निकलकर गहरी हिमालयी घाटियों से होती हुई नेपाल में प्रवेश करती है। भारी मात्रा में मलबा नदी में गिरने के कारण पानी का प्राकृतिक रास्ता अचानक बंद हो गया।

3. नदी के रास्ते में बन गई 'कृत्रिम झील'
मलबे ने नदी के रास्ते में एक तरह का अस्थायी बांध बना दिया। इसके पीछे पानी जमा होने लगा और कुछ समय के लिए वहां एक कृत्रिम झील जैसी स्थिति बन गई। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर शुरुआती अनुमान है कि यह मलबा नदी से करीब 20 किलोमीटर ऊपर पानी का रास्ता रोक रहा था। यहीं से असली खतरा पैदा हुआ।

4. अस्थायी बांध टूटा और आया सैलाब
मलबे से बना अस्थायी बांध पानी का दबाव ज्यादा देर तक नहीं झेल सका। जैसे ही यह टूटा, उसके पीछे जमा पानी बेहद तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहने लगा। लेकिन यह सिर्फ पानी नहीं था। इसके साथ मिट्टी, चट्टान, बर्फ और भारी गाद भी बह रही थी। इस वजह से सामान्य बाढ़ देखते ही देखते एक बेहद ताकतवर फ्लैश फ्लड और मलबे के सैलाब में बदल गई। सुबह करीब 9 बजे यह तेज बहाव भोटेकोशी नदी तक पहुंचा और फिर रसुवागढ़ी बॉर्डर एरिया, तिमुरे समेत कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

5. पानी ने रास्ते में जो मिला, बहा दिया
तेज रफ्तार से आया पानी और मलबा सड़क, पुल और इमारतों को नुकसान पहुंचाता हुआ आगे बढ़ता गया। इसके बाद बाढ़ का प्रभाव त्रिशूली नदी तक पहुंचा और नुवाकोट समेत निचले इलाकों में भी पानी का स्तर तेजी से बढ़ने लगा।
गलछी इलाके में तो नदी का जलस्तर महज करीब 30 मिनट में 9 मीटर तक बढ़ने की सूचना सामने आई, जिससे खतरे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

6. हिमालय की भौगोलिक स्थिति ने बढ़ाई तबाही
रसुवा का इलाका हिमालय की बेहद खड़ी ढलानों और संकरी घाटियों वाला क्षेत्र है। ऐसे इलाके में अगर अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की तरफ आता है, तो उसे फैलने के लिए ज्यादा जगह नहीं मिलती। संकरी घाटियां पानी और मलबे को एक तरह से प्राकृतिक चैनल की तरह आगे धकेलती हैं। यही वजह है कि सैलाब ने बेहद कम समय में लंबी दूरी तय की और रास्ते में भारी तबाही मचाई।

13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी तबाह
इस फ्लैश फ्लड ने सिर्फ सड़क और पुलों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी प्रभावित या तबाह होने की जानकारी सामने आई है। इससे नेपाल के महत्वपूर्ण जलविद्युत क्षेत्र को भी बड़ा झटका लगा है।

खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं
सबसे बड़ी चिंता यह है कि नदी के ऊपरी हिस्से में अभी भी मलबा जमा होने की बात सामने आ रही है। अगर वहां दोबारा पानी जमा हुआ और मलबे का कोई हिस्सा फिर टूट गया, तो दूसरी फ्लैश फ्लड का खतरा पैदा हो सकता है। इसी वजह से नेपाल और चीन की एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिक सैटेलाइट तस्वीरों, नदी के जलस्तर और भूकंपीय रिकॉर्ड का अध्ययन कर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे कितना खतरा बना हुआ है। 

और पढ़ें: नेपाल में तबाही: अबतक 700 से ज्यादा लोग लापता, पीएम मोदी ने बढ़ाया मदद का हाथ