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नासिक धर्मांतरण मामला: आरोपी निदा खान को मिली जमानत, कोर्ट ने फैसले में भगवान श्रीकृष्ण का क्यों किया उल्लेख?
महाराष्ट्र के नासिक जिले में कथित धर्मांतरण से जुड़े चर्चित मामले में आरोपी निदा खान को विशेष अदालत से जमानत मिल गई है। इस मामले में अदालत के आदेश की सबसे अधिक चर्चा इसलिए हो रही है।
महाराष्ट्र के नासिक जिले में कथित धर्मांतरण से जुड़े चर्चित मामले में आरोपी निदा खान को विशेष अदालत से जमानत मिल गई है। इस मामले में अदालत के आदेश की सबसे अधिक चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि जमानत देते समय न्यायाधीश ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि जिस प्रकार श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था, उसी तरह किसी भी नवजात को जेल में जन्म लेने की स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए। जानकारी के अनुसार, निदा खान लगभग पांच महीने की गर्भवती हैं। अदालत ने उनकी गर्भावस्था को ध्यान में रखते हुए यह माना कि जेल में बच्चे का जन्म होना उसके भविष्य और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसी आधार पर न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए उन्हें जमानत प्रदान की गई।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला नासिक की एक आईटी कंपनी से जुड़ा है, जहां निदा खान पर अपनी सहकर्मी पर इस्लाम धर्म अपनाने के लिए कथित रूप से धार्मिक दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, उन्होंने सहकर्मियों को बुर्का और धार्मिक पुस्तकें उपलब्ध कराईं तथा उनके मोबाइल फोन में धार्मिक ऐप्स भी इंस्टॉल करवाए। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण सहित अन्य हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम सत्यापन न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगा और अदालत में इनकी सुनवाई जारी रहेगी।
अदालत ने आदेश में क्या कहा?
विशेष न्यायाधीश के. जी. जोशी ने अपने आदेश में कहा कि यह निर्विवाद तथ्य है कि आवेदिका पांच महीने की गर्भवती हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि भगवान श्रीकृष्ण की तरह किसी भी बच्चे को जेल में जन्म लेने का आघात या उससे जुड़ा सामाजिक कलंक नहीं झेलना चाहिए। अदालत ने कहा कि नवजात के हित, उसके स्वागत और समग्र कल्याण को देखते हुए आरोपी के पक्ष में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करना उचित होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ऐसे में जांच प्रभावित होने की संभावना कम है, जिसे जमानत पर विचार करते समय महत्वपूर्ण आधार माना गया।
अन्य आरोपियों की तुलना में अलग स्थिति
अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि निदा खान के खिलाफ केवल देवलाली कैंप थाने में दर्ज एक मामले में चार्जशीट दाखिल की गई है। वहीं, इस प्रकरण के सात अन्य आरोपियों के खिलाफ 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच कुल नौ एफआईआर दर्ज हुई थीं। अदालत ने माना कि आरोपी की व्यक्तिगत परिस्थितियां और मामले की वर्तमान स्थिति जमानत पर विचार करने के लिए प्रासंगिक हैं।
क्यों चर्चा में है यह फैसला?
यह आदेश इसलिए उल्लेखनीय माना जा रहा है क्योंकि जिस आरोपी पर हिंदू देवी-देवताओं के कथित अपमान का आरोप है, उसी मामले में अदालत ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का संदर्भ देते हुए मानवीय आधार पर जमानत दी। न्यायालय ने इस धार्मिक संदर्भ का उपयोग किसी धार्मिक टिप्पणी के रूप में नहीं, बल्कि यह समझाने के लिए किया कि किसी भी नवजात को जेल में जन्म लेने जैसी परिस्थिति से बचाया जाना चाहिए। ध्यान देने वाली बात यह है कि जमानत दिया जाना किसी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का प्रमाण नहीं होता। जमानत केवल यह सुनिश्चित करती है कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक आरोपी कुछ शर्तों के साथ जेल से बाहर रह सके। मामले में लगाए गए सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर अदालत द्वारा ही किया जाएगा।
Written By: Geeta Sharma
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