Meerut Murder Case: मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई गई है। करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 तारीखों और लगभग 1000 पन्नों की चार्जशीट के बाद अदालत ने यह फैसला दिया।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड ने लंबे समय तक सुर्खियां बटोरीं। मार्च 2025 में एक घर से सीमेंट से बंद नीला ड्रम मिलने के बाद मामले का खुलासा हुआ था। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को आरोपी बनाया। बाद में अदालत ने दोनों को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए 14 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा सुनाई। इस मामले में पुलिस की जांच से लेकर अदालत के फैसले तक कई अहम पड़ाव आए। आइए जानते हैं कि सौरभ राजपूत हत्याकांड में कब क्या हुआ।
फरवरी 2025: लंदन से लौटे थे सौरभ राजपूत
रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे। अगले दिन परिवार में मुस्कान का जन्मदिन मनाया गया था। इसके कुछ दिन बाद ही सौरभ की हत्या कर दी गई। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 और 4 मार्च के बीच मुस्कान ने कथित तौर पर खाने के जरिए सौरभ को बेहोश किया, जिसके बाद साहिल वहां पहुंचा। आरोप था कि दोनों ने मिलकर सौरभ की हत्या की और शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े कर दिए।इसके बाद शव के अवशेषों को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में बंद कर दिया गया। ये अभियोजन पक्ष के आरोप थे, जिन पर आगे अदालत में सुनवाई हुई।
17 मार्च 2025: नीले ड्रम से सामने आया मामला
मार्च 2025 के मध्य में मुस्कान के कुछ परिजनों को घटना को लेकर संदेह हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। 17 मार्च को मेरठ के इंद्रा नगर इलाके में एक घर से सीमेंट से बंद नीला ड्रम खोला गया। उसमें सौरभ के शव के अवशेष मिले। इस बरामदगी के बाद हत्या का मामला सामने आया और पुलिस ने जांच तेज कर दी। 18 मार्च 2025 को पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया। अगले दिन अदालत ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
मई 2025: करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल
जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने 12 मई 2025 को अदालत में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें लगभग 34 गवाहों के बयान शामिल थे। चार्जशीट में पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने से जुड़े आरोपों का विवरण पेश किया। इसके बाद मामला सुनवाई के चरण में पहुंचा।
जुलाई 2025 से सितंबर 2026: 13 महीने तक चली सुनवाई
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2025 में मेरठ की जिला अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने अपना मामला पेश किया और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। करीब 13 महीने तक चली सुनवाई में 126 तारीखें पड़ीं और 22 से अधिक गवाहों की गवाही हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और पेश किए गए सबूतों पर विचार किया। 30 सितंबर 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या के मामले में दोषी करार दिया। सजा पर फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की गई।
14 अक्टूबर 2026: दोनों दोषियों को मौत की सजा
14 अक्टूबर को सजा पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। अभियोजन पक्ष ने अपराध को सुनियोजित और बेहद गंभीर बताते हुए अधिकतम सजा की मांग की। रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ के परिवार ने भी मौत की सजा की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने कम से कम सजा देने की अपील की। इसके लिए दोषियों के माता-पिता की उम्र और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला दिया गया। आखिरकार, मेरठ की जिला अदालत ने मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाई। यह फैसला मामले की सुनवाई का बड़ा पड़ाव है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
सौरभ राजपूत हत्याकांड क्यों रहा चर्चा में?
इस मामले में शव को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने की बात सामने आने के बाद व्यापक चर्चा हुई थी। जांच, चार्जशीट और लंबी अदालती सुनवाई के दौरान मामले पर लगातार नजर बनी रही। अब मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अगला अहम चरण हाई कोर्ट में सजा की पुष्टि और संभावित अपीलों का होगा। अदालतों की आगे की कार्यवाही से ही इस मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।