नई दिल्ली: भारतीय सेना के जवानों तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल की है। सोमवार को भारतीय सेना ने ‘भारत राइस’ की शुरुआत की। इसके साथ ही भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साथ एक समझौता भी किया गया, जिसके तहत जरूरत पड़ने पर सेना राशन के भंडारण और उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए FCI के संसाधनों का इस्तेमाल कर सकेगी।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस पहल का मकसद जवानों तक चावल पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। खासकर लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसे दूरदराज के इलाकों में तैनात जवानों तक राशन पहुंचाने में यह व्यवस्था मददगार हो सकती है।

अब सेना के सप्लाई डिपो तक पहुंचेगा चावल

नई व्यवस्था के तहत उच्च गुणवत्ता वाला चावल सीधे सेना के सप्लाई डिपो तक पहुंचाया जाएगा। अभी सेना के डिपो को स्थानीय FCI केंद्रों से राशन लेने के लिए अलग व्यवस्था करनी पड़ती है। सीधे डिपो तक आपूर्ति होने से जवानों के लिए राशन जुटाने और उसे आगे पहुंचाने की प्रक्रिया में राहत मिलने की उम्मीद है।

लद्दाख और पूर्वोत्तर के कई इलाकों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबी दूरी के कारण सामान पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था सेना की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है।

आपात स्थिति में FCI के संसाधनों का इस्तेमाल

भारतीय सेना और FCI के बीच हुए समझौते का एक अहम हिस्सा आपात परिस्थितियों में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके तहत सेना जरूरत पड़ने पर FCI के गोदामों, कर्मचारियों और सामान की ढुलाई व संभाल से जुड़े संसाधनों का उपयोग कर सकेगी।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से भी यह सीख मिली कि सैन्य अभियानों को लंबे समय तक जारी रखने के लिए मजबूत और भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था जरूरी है। किसी भी सैन्य अभियान में हथियारों और उपकरणों के साथ भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों की समय पर उपलब्धता भी अहम होती है।

जवानों की सुविधा पर सरकार का जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी की मौजूदगी में भारत राइस की शुरुआत और समझौते से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। राजनाथ सिंह ने इस पहल को किसानों की मेहनत और जवानों की सेवा के बीच जुड़ाव का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के कल्याण और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान है।

इस पहल से सेना की राशन आपूर्ति व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इससे अलग-अलग क्षेत्रों में आपूर्ति की समयसीमा कितनी घटेगी, इस बारे में मंत्रालय ने कोई निश्चित आंकड़ा जारी नहीं किया है।

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