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मराठी साइनबोर्ड पर सरकार का बड़ा खुलासा, कहा- 3,861 प्रतिष्ठानों से करोड़ों का...
सरकार ने बताया कि नवंबर 2023 से 4 जून 2026 तक बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने 10 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया, साथ ही नियम तोड़ने वालों से जुर्माना भी वसूला गया है।
मुंबई में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर मराठी (देवनागरी) भाषा में साइनबोर्ड लगाने के नियम को लेकर एक बार फिर सख्ती देखने को मिल रही है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने नियमों का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य सरकार ने विधानसभा में इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि मराठी भाषा में नामपट्ट लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
विधायक संतोष दानवे के सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने दिया जवाब
यह मुद्दा विधानसभा में विधायक संतोष दानवे द्वारा उठाए गए प्रश्न के बाद चर्चा में आया। उनके सवाल के लिखित जवाब में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर 2023 को दिए अपने आदेश में भी मराठी (देवनागरी) में साइनबोर्ड लगाने के नियम का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
बीएमसी ने 10 लाख से अधिक दुकानों का किया निरीक्षण
सरकार के अनुसार, नवंबर 2023 से लेकर 4 जून 2026 तक बीएमसी ने 10 लाख से अधिक दुकानों और प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। प्रमुख सड़कों पर स्थित 2,00,067 प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान 1,93,747 प्रतिष्ठानों पर मराठी भाषा में साइनबोर्ड पाए गए, जबकि 6,320 प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
विधानसभा में दी ये जानकारी
विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई के तहत 3,861 प्रतिष्ठानों से 1.95 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया। वहीं, 1,003 प्रतिष्ठानों ने लगभग 1.02 करोड़ रुपये की कंपाउंडिंग फीस जमा कर मामला निपटा लिया। इसके अलावा 1,456 मामले अभी भी न्यायालय में विचाराधीन हैं।
अधिकारियों की कमी बनी एक चुनौती
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में अधिकारियों की कमी एक चुनौती बनी हुई है। संबंधित विभाग में स्वीकृत 121 पदों में से फिलहाल केवल 53 अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 68 पद रिक्त हैं। सरकार का कहना है कि इन रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
चलाया गया विशेष निरीक्षण अभियान
मराठी साइनबोर्ड नियम के पालन को और प्रभावी बनाने के लिए 14 मई से 4 जून 2026 तक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। इसके साथ ही व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जनजागरण अभियान भी संचालित किया जा रहा है।
सरकार ने कही ये बात
सरकार ने दोहराया है कि मराठी (देवनागरी) में साइनबोर्ड लगाना कानून के तहत अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ बीएमसी की ओर से जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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