उज्जैन के छतरी चौक इलाके में शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने को लेकर आज यानी सोमवार को तनाव की स्थिति बन गई। बीते दिन यानी रविवार रात से मस्जिद के आसपास लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। सोमवार सुबह पुलिस और लोगों के बीच विवाद बढ़ा और स्थिति झड़प तक पहुंच गई। इस दौरान पथराव और मारपीट की घटनाएं हुईं, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। घटना के बाद शाही मस्जिद और छतरी चौक के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। पुलिस के साथ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
पूरा विवाद सड़क चौड़ीकरण की योजना से जुड़ा है। उज्जैन नगर निगम शहर में कुछ सड़कों को चौड़ा करने का काम कर रहा है। प्रशासन के मुताबिक यह काम उज्जैन विकास योजना 2035 और आने वाले सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का हिस्सा है।
छतरी चौक में जिस सड़क का चौड़ीकरण प्रस्तावित है, उसकी चौड़ाई 15 मीटर तक किए जाने की योजना है। इसी प्रस्तावित सड़क के दायरे में शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा आ रहा है।
प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ (महापर्व प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर आयोजित होता है) के दौरान उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। ऐसे में यातायात, पैदल आवाजाही और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़कें चौड़ी करना जरूरी है।
प्रशासन का क्या कहना है?
उज्जैन के कलेक्टर रौशन सिंह के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण के काम में अलग-अलग समुदायों के लोग प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं, उनका कहना है कि जिन लोगों के मकान या धार्मिक स्थलों का कुछ हिस्सा प्रस्तावित सड़क की सीमा में आ रहा है, उनमें से कई लोग अपनी सहमति से संबंधित निर्माण हटा रहे हैं।
प्रशासन के मुताबिक शाही मस्जिद का सड़क की सीमा में आने वाला हिस्सा भी मस्जिद कमेटी की सहमति से हटाया जा रहा है। कलेक्टर ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
मस्जिद कमेटी का पक्ष क्या है?
शहर क़ाज़ी खलीक उर रहमान के मुताबिक मस्जिद कमेटी और जिला प्रशासन के बीच रविवार रात बातचीत हुई थी। इसके बाद कमेटी ने सड़क की प्रस्तावित सीमा में आने वाले हिस्से को खुद हटाने पर सहमति जताई।
हालांकि, उनके मुताबिक कुछ लोग अफवाहों के कारण नाराज हो गए और इसके बाद इलाके में तनाव तथा झड़प की स्थिति बनी।
मस्जिद कमेटी का कहना है कि वह सिंहस्थ या उसके आयोजन का विरोध नहीं करती। विवाद सड़क चौड़ीकरण के तरीके और धार्मिक स्थल के हिस्से को हटाने को लेकर है।
कमेटी का तर्क है कि सड़क के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तलाशकर धार्मिक स्थल को नुकसान से बचाया जाना चाहिए।
मस्जिद कितनी पुरानी है?
मस्जिद कमेटी और शहर क़ाज़ी शाही मस्जिद को करीब 650 वर्ष पुरानी बताते हैं। शहर क़ाज़ी के अनुसार इसका निर्माण लगभग 1390 के आसपास हुआ था।
इसी ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए मस्जिद पक्ष ने प्रशासन से वैकल्पिक रास्ता या ऐसी व्यवस्था तलाशने की मांग की है, जिससे मस्जिद के हिस्से को हटाने की जरूरत न पड़े।
हालांकि, सड़क चौड़ीकरण को लेकर अदालत में हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम ने कहा था कि कार्रवाई सिर्फ शाही मस्जिद के खिलाफ नहीं है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इनमें नगर निगम के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी।
9 सितंबर को हाई कोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि प्रस्तावित कार्रवाई से मस्जिद के प्रार्थना स्थल का एक हिस्सा, करीब 120 फुट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही प्रभावित होंगे। याचिकाओं में संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के तहत अधिकारों का भी हवाला दिया गया था।
अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि नगर निगम ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया और प्रभावित लोगों को अपनी आपत्तियां रखने का अवसर दिया।
क्या अदालत ने इसे सिर्फ मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई माना?
नहीं। अदालत के सामने नगर निगम ने कहा था कि सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई केवल शाही मस्जिद तक सीमित नहीं है।
अदालत के रिकॉर्ड में बताया गया कि इसी सड़क के अलग-अलग हिस्सों में पहले दस मंदिरों और एक मस्जिद के कुछ निर्माण हटाए जा चुके हैं। आदेश में उज्जैन में करीब 80 धार्मिक स्थलों से जुड़े निर्माण के संबंध में कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया।
अदालत ने यह भी कहा कि केवल किसी निर्माण के धार्मिक स्थल होने से नगर निगम की कार्रवाई अपने-आप मनमानी नहीं हो जाती।
मस्जिद पक्ष ने यह तर्क दिया था कि धार्मिक स्थल होने के कारण एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
सिंहस्थ 2028 का इस विवाद से क्या संबंध है?
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां चल रही हैं। इस आयोजन के दौरान शहर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन यातायात और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की योजनाओं पर काम कर रहा है।
शाही मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर के सामने के इलाके और क्षिप्रा नदी के नजदीक स्थित है। यह क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
हाई कोर्ट ने भी अपने आदेश में सिंहस्थ के दौरान बढ़ने वाली भीड़ और यातायात व्यवस्था की जरूरत का उल्लेख किया था। प्रशासन सड़क चौड़ीकरण को इसी व्यापक योजना का हिस्सा बता रहा है।
अब मामला किस स्थिति में है?
9 सितंबर के हाई कोर्ट के फैसले के बाद मस्जिद कमेटी ने बड़ी बेंच के सामने इस मामले को उठाया है। कमेटी की ओर से कार्रवाई पर रोक लगाने और मस्जिद के प्रभावित हिस्से को बचाने की मांग किए जाने की बात कही गई है।
मस्जिद कमेटी से जुड़े लोगों ने यह भी कहा है कि अगर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
इस बीच प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुई बातचीत के बाद सड़क की सीमा में आने वाले हिस्से को हटाने की प्रक्रिया कमेटी की ओर से किए जाने की बात सामने आई है।
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सोमवार की झड़प के बाद क्या स्थिति है?
छतरी चौक और शाही मस्जिद के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरपीएफ के जवानों को भी लगाया गया है। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। प्रशासन और शहर क़ाज़ी दोनों की ओर से लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने और शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
फिलहाल विवाद के दो प्रमुख पहलू हैं-एक तरफ सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रशासन की योजना है, और दूसरी तरफ धार्मिक तथा ऐतिहासिक महत्व वाले निर्माण को बचाने की मस्जिद कमेटी की मांग। आगे की कानूनी कार्रवाई और अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि प्रभावित हिस्से को लेकर अंतिम स्थिति क्या रहती है।