Bihar Flood 2026: बिहार में लगातार बढ़ रहे नदी के जलस्तर ने कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। गंगा समेत गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हालात को देखते हुए बिहार सरकार ने संवेदनशील जिलों में NDRF और SDRF की 33 टीमें तैनात की हैं। इसके अलावा प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए 693 सरकारी नावें भी राहत और बचाव अभियान में लगाई गई हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में NDRF की 6 और SDRF की 27 टीमें तैनात हैं। ये टीमें राहत और बचाव कार्यों के लिए 24 घंटे तैयार रखी गई हैं।प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालने और उन्हें सुरक्षित जगहों तक पहुंचाने के लिए सरकारी नावों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से राहत कैंप और कम्युनिटी किचन चलाए जा रहे हैं, ताकि प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाया जा सके।
गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
अधिकारियों के अनुसार, गंगा नदी पटना सदर के दीघा और गांधी घाट, मोकामा के हाथीदह के अलावा बक्सर, मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।गंडक नदी भी गोपालगंज के सिधवलिया स्थित डुमरिया घाट और वैशाली के हाजीपुर में खतरे के निशान को पार कर चुकी है। वहीं, कोसी नदी खगड़िया के गोगरी स्थित बलतारा और कटिहार के कुरसेला में खतरे के निशान से ऊपर है।इसके अलावा खगड़िया में बूढ़ी गंडक, पटना के श्रीपालपुर में पुनपुन और सीवान के दरौली में घाघरा नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
वैशाली में घरों में घुसा बाढ़ का पानी
गंगा का जलस्तर बढ़ने से वैशाली जिले के कुछ इलाकों में घर आंशिक रूप से जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।अधिकारियों का कहना है कि लगातार मॉनिटरिंग और प्रशासनिक तैयारियों की वजह से बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिल रही है। प्रभावित जिलों में राहत अभियान चलाए जा रहे हैं और निचले इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
सम्राट चौधरी ने किया बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को बाढ़ की स्थिति का हवाई सर्वे किया। इसके बाद अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने बाढ़ की स्थिति, तटबंधों और राहत-बचाव की तैयारियों की समीक्षा की।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों तक समय पर राहत और जरूरी सेवाएं पहुंचाई जाएं। सभी प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी करने और प्रभावित लोगों की सूची तैयार करने को कहा गया है।
राहत कैंप और कम्युनिटी किचन पर फोकस
प्रशासन को बाढ़ राहत कैंपों और कम्युनिटी किचन में भोजन और अन्य जरूरी सामान की निर्बाध व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कमजोर और निचले इलाकों की लगातार निगरानी के साथ-साथ तटबंधों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।जल संसाधन विभाग को बक्सर से भागलपुर तक तटबंधों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। भागलपुर, भोजपुर, पटना, वैशाली समेत कई जिलों में कम्युनिटी किचन शुरू किए गए हैं।
बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछली न खाने की सलाह
बाढ़ के बीच बिहार के डेयरी, फिशरीज और एनिमल रिसोर्स डिपार्टमेंट ने लोगों के लिए एक अलग एडवाइजरी भी जारी की है। लोगों को बाढ़ के पानी के साथ नेपाल की ओर से आने वाली अनजान या असामान्य दिखने वाली मछलियों को नहीं खाने की सलाह दी गई है।विभाग के मुताबिक, बाढ़ के कारण विस्थापित मछलियां सीवेज, मरे हुए जानवरों और दूसरे प्रदूषित कचरे के संपर्क में आ सकती हैं। ऐसे में उनमें बैक्टीरिया, वायरस या फंगस का संक्रमण होने की आशंका हो सकती है। लोगों से हालात सामान्य होने तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों से बचने की अपील की गई है।
आने वाले दिनों में बारिश से बढ़ सकती है चुनौती
अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बिहार के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। ऐसे में नदियों के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रखना प्रशासन के लिए अहम होगा।