धर्म
पुत्रदा एकादशी पर बेटी की चाहत है तो क्या करें? जानें व्रत, पूजा और मंत्र की सही विधि
पुत्रदा एकादशी का संबंध भले ही शास्त्रीय कथा में पुत्र प्राप्ति से जोड़ा गया हो, लेकिन बेटी की इच्छा रखने वाले दंपती भी श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं। जानें पुत्रदा एकादशी पर बेटी की कामना के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कैसे करें, कौन-से मंत्र का जाप करें और तुलसी से जुड़े कौन-से उपाय किए जा सकते हैं।
सावन में पुत्रदा एकादशी का व्रत इस बार 23 और 24 अगस्त को लेकर चर्चा में है। जब एकादशी तिथि दोनों दिन सूर्योदय के समय विद्यमान हो, तो गृहस्थों के लिए पहले दिन व्रत करने की परंपरा मानी जाती है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि पुत्रदा एकादशी क्या केवल पुत्र प्राप्ति के लिए ही होती है? अगर किसी दंपती को बेटी की इच्छा हो, तो क्या वे यह व्रत कर सकते हैं?
पुत्रदा एकादशी की कथा में पुत्र प्राप्ति का उल्लेख
धार्मिक मान्यताओं और एकादशी की कथा को देखें तो इसका संबंध संतान प्राप्ति से जरूर है, लेकिन आज के संदर्भ में इसकी प्रार्थना को केवल पुत्र तक सीमित मानना आवश्यक नहीं है। दंपती भगवान विष्णु से स्वस्थ, संस्कारी और सुखी संतान की कामना करते हुए यह व्रत कर सकते हैं।
पुत्रदा एकादशी का नाम पुत्र प्राप्ति से क्यों जुड़ा?
पुत्रदा एकादशी की कथा में राजा सुकेतुमान और उनकी पत्नी का उल्लेख मिलता है। संतानहीन राजा संतान प्राप्ति की इच्छा से चिंतित थे। कथा के अनुसार भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी गई। व्रत के फलस्वरूप उन्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। इसी कारण शास्त्रीय कथा में इस एकादशी का फल विशेष रूप से पुत्र प्राप्ति से जोड़ा गया है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि बेटी की इच्छा रखने वाले दंपती इस व्रत को नहीं कर सकते।
क्या बेटी की इच्छा रखने वाले कर सकते है पुत्रदा एकादशी का व्रत?
बता दें कि बेटी की कामना रखने वाले दंपती भी श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की पूजा और एकादशी व्रत कर सकते हैं। पूजा के समय संकल्प में अपनी मनोकामना स्पष्ट रूप से भगवान के सामने रखी जा सकती है। ऐसे में केवल “पुत्र प्राप्ति” की इच्छा रखने के बजाय स्वस्थ, दीर्घायु, संस्कारी और सद्गुणी संतान की कामना करना अधिक व्यापक और सकारात्मक संकल्प माना जा सकता है। यदि विशेष रूप से पुत्री की इच्छा है, तो दंपती भगवान से स्वस्थ और सुखी पुत्री की प्राप्ति के लिए भी प्रार्थना कर सकते हैं। मनुस्मृति के 9.130 में “पुत्रेण दुहिता समा” का उल्लेख मिलता है, जिसका भाव है कि पुत्री को पुत्र के समान माना गया है। इसलिए संतान के रूप में बेटी की कामना को धार्मिक रूप से हीन नहीं माना जाना चाहिए।
बेटी की कामना हो तो पुत्रदा एकादशी पर क्या करें?
इस दिन दंपती भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं। व्रत अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार रखें तथा पूजा में मनोकामना के साथ संतान के अच्छे स्वास्थ्य, संस्कार और सुखी जीवन की प्रार्थना करें।
पूजा के दौरान:
* भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।
* माता लक्ष्मी को कमल अथवा सफेद या लाल पुष्प चढ़ा सकते हैं।
* भगवान विष्णु के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
* सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें।
* पति-पत्नी मिलकर लक्ष्मी-नारायण की पूजा और संतान सुख की प्रार्थना कर सकते हैं।
माता लक्ष्मी की उपासना केवल धन-समृद्धि तक सीमित नहीं मानी जाती। धार्मिक परंपरा में उन्हें सौभाग्य, समृद्धि, ऐश्वर्य और गृहस्थ सुख से भी जोड़ा जाता है। इसलिए संतान सुख की कामना में लक्ष्मी-नारायण की पूजा की जा सकती है।
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भगवान विष्णु को तुलसी दल करें अर्पित
स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें स्वच्छ तुलसी दल अर्पित करें। तुलसी अर्पित करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जा सकता है।
Written By Toshi Shah
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। TNP News इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
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