‘हनुमान अंश’ के बाद नीब करौरी बाबा को लेकर लोगों की रुचि लगातार बढ़ती नजर आ रही है। इसका सीधा असर उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में दिखाई दे रहा है। खासकर शनिवार-रविवार और लंबे छुट्टी के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कैंची धाम जाने वाले रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। कई बार जाम इतना बढ़ जाता है कि लोगों को वाहन छोड़कर पैदल ही आगे जाना पड़ता है।
बता दें कि कैंची धाम में रोजाना पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पहले करीब 4 से 5 हजार के आसपास बताई जाती थी। हाल के दिनों में यह आंकड़ा 6 हजार से ऊपर पहुंच गया, जबकि वीकेंड पर 15 से 20 हजार या उससे अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही जा रही है। हालांकि, नीब करौरी बाबा से जुड़े आध्यात्मिक स्थलों की पहचान केवल कैंची धाम तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों में उनके आश्रम और मंदिर मौजूद हैं, जहां श्रद्धालु आध्यात्मिक अनुभव के लिए पहुंचते हैं। आइए जानते हैं उनके कुछ प्रमुख स्थलों के बारे में।
वृंदावन आश्रम
नीब करौरी बाबा से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में वृंदावन स्थित आश्रम का विशेष स्थान है। यह आश्रम 1967 में परिक्रमा मार्ग पर मथुरा रोड के नजदीक स्थापित किया गया था। वर्ष 1973 में महाराजजी ने यहीं महासमाधि ली थी। आश्रम परिसर में हनुमान जी, मां दुर्गा, सीता-राम और भगवान शिव के मंदिर हैं। इसके अलावा यहां महाराजजी का महासमाधि मंदिर भी स्थित है। हर साल सितंबर में उनकी स्मृति में महासमाधि भंडारे का आयोजन किया जाता है। बताया जाता है कि 1973 में चैत्र नवरात्र के दौरान महाराजजी ने यहां नौ दिवसीय यज्ञ कराया था। बाद में उनकी स्मृति से जुड़े स्थान पर एक मंदिर का निर्माण किया गया। इसकी खासियत यह है कि इसकी वास्तुकला में मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा और पगोडा जैसी विभिन्न धार्मिक स्थापत्य शैलियों की झलक दिखाई देती है।
दिल्ली का नीब करौरी बाबा आश्रम
दिल्ली में स्थित आश्रम भी महाराजजी से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल है। इसकी शुरुआत 1973 की गर्मियों में हुई थी। यह स्थान मेहरौली के आसपास मंडी रोड से जोनापुर की दिशा में स्थित है। आश्रम में सुबह और शाम नियमित आरती होती है। हरे-भरे और शांत वातावरण के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक माहौल का अनुभव होता है। आश्रम में ठहरने की इच्छा रखने वाले लोगों को पहले अनुमति लेनी होती है और अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने पड़ते हैं।
काकड़ीघाट
उत्तराखंड के अल्मोड़ा के काकड़ीघाट भी नीब करौरी बाबा की आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यह जगह अल्मोड़ा और रानीखेत के बीच कोसी नदी के किनारे स्थित है। काकड़ीघाट का संबंध कई संतों और आध्यात्मिक व्यक्तित्वों से रहा है। नीब करौरी बाबा के अलावा सोमबारी बाबा और पंजाबी बाबा से भी इसका जुड़ाव बताया जाता है। स्वामी विवेकानंद के यहां आने का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि उन्होंने 1890 के आसपास यहां पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान किया था। नीब करौरी बाबा के लिए भी यह स्थान लंबे समय तक ध्यान और साधना से जुड़ा रहा। कोसी नदी का किनारा, पहाड़ों का वातावरण और अपेक्षाकृत शांत माहौल काकड़ीघाट को कैंची धाम की भीड़ से अलग एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। उत्तराखंड का काकड़ीघाट भी नीब करौरी बाबा की आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यह जगह अल्मोड़ा और रानीखेत के बीच कोसी नदी के किनारे स्थित है। काकड़ीघाट का संबंध कई संतों और आध्यात्मिक व्यक्तित्वों से रहा है। नीब करौरी बाबा के अलावा सोमबारी बाबा और पंजाबी बाबा से भी इसका जुड़ाव बताया जाता है। स्वामी विवेकानंद के यहां आने का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि उन्होंने 1890 के आसपास यहां पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान किया था। नीब करौरी बाबा के लिए भी यह स्थान लंबे समय तक ध्यान और साधना से जुड़ा रहा। कोसी नदी का किनारा, पहाड़ों का वातावरण और अपेक्षाकृत शांत माहौल काकड़ीघाट को कैंची धाम की भीड़ से अलग एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।