भारतीय खाना अपने स्वाद, विविधता और रंगों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। दाल, चावल, रोटी, सब्जी, अचार और रायता से सजी हमारी थाली देखने में जितनी स्वादिष्ट लगती है, उतनी ही भरपूर भी होती है। लेकिन जब बात शरीर की प्रोटीन जरूरत की आती है, तो हमारी रोजमर्रा की डाइट कई बार पीछे रह जाती है। शरीर को मजबूत बनाने, मांसपेशियों की ग्रोथ और रोजमर्रा के काम के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी पोषक तत्व है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक स्वस्थ वयस्क को अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल करना चाहिए। हालांकि, हमारी पारंपरिक थाली में कई ऐसी चीजें शामिल होती हैं, जिनमें कार्बोहाइड्रेट तो भरपूर होता है, लेकिन प्रोटीन अपेक्षाकृत कम होता है।

थाली में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा
भारतीय खाने में रोटी, चावल, पोहा और आलू जैसी चीजें आम हैं। ये शरीर को ऊर्जा देने वाले कार्बोहाइड्रेट के अच्छे स्रोत हैं, लेकिन इन्हें ज्यादा मात्रा में खाने से प्लेट का बड़ा हिस्सा इन्हीं से भर जाता है। ऐसे में प्रोटीन से भरपूर चीजों के लिए जगह कम बचती है। यही वजह है कि सिर्फ पेट भरने और पर्याप्त पोषण मिलने में अंतर रह जाता है। थाली में अनाज के साथ प्रोटीन के बेहतर स्रोतों को शामिल करना जरूरी है।

सिर्फ दाल-चावल से पूरी नहीं होगी प्रोटीन की जरूरत
भारत में दाल को प्रोटीन का प्रमुख स्रोत माना जाता है और यह सही भी है। लेकिन केवल दाल पर निर्भर रहकर रोज की प्रोटीन जरूरत पूरी करना आसान नहीं है। दालों में प्रोटीन के साथ कार्बोहाइड्रेट भी मौजूद होता है। इसलिए सिर्फ दाल की मात्रा बढ़ाते जाना इसका व्यावहारिक समाधान नहीं है। बेहतर तरीका यह है कि दाल के साथ पनीर, दूध-दही, सोया, चना, राजमा, मूंगफली या अंडे जैसे दूसरे प्रोटीन स्रोत भी डाइट में शामिल किए जाएं।

शाकाहारी डाइट में सही कॉम्बिनेशन जरूरी
शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन के कई अच्छे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन अलग-अलग खाद्य पदार्थों में अमीनो एसिड का प्रोफाइल अलग हो सकता है। इसलिए अनाज और दालों का सही संयोजन फायदेमंद माना जाता है। दाल-चावल, राजमा-चावल, छोले-रोटी और खिचड़ी जैसे कॉम्बिनेशन इसी वजह से बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इसके अलावा सोया, पनीर, टोफू, दूध और दही को डाइट में शामिल करने से प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

खाना पकाने का तरीका भी है महत्वपूर्ण
भोजन को बहुत ज्यादा देर तक पकाने या बार-बार गर्म करने से कुछ पोषक तत्वों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सामान्य खाना पकाने से प्रोटीन पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता। इसलिए जरूरी है कि खाना सही तरीके से और जरूरत के मुताबिक पकाया जाए। दाल, सब्जी और दूसरे खाद्य पदार्थों को जरूरत से ज्यादा पकाने या बार-बार गर्म करने से बचना बेहतर है।

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शाम के स्नैक्स में भी बढ़ाएं प्रोटीन
प्रोटीन की कमी का एक कारण हमारी स्नैकिंग की आदतें भी हो सकती हैं। शाम की चाय के साथ समोसा, कचौरी, बिस्कुट और नमकीन खाना आम है। इन चीजों में कैलोरी और फैट तो ज्यादा हो सकता है, लेकिन प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम रहती है। इसके बजाय भुना चना, मूंगफली, मखाना, स्प्राउट्स, दही या अंडे जैसे विकल्प चुने जा सकते हैं। इससे स्वाद के साथ डाइट में प्रोटीन भी बढ़ेगा।

थाली में इन चीजों को करें शामिल
अगर आप अपनी रोज की डाइट में प्रोटीन बढ़ाना चाहते हैं तो बहुत बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है। कुछ छोटी आदतों को अपनाकर शुरुआत की जा सकती है।

पनीर और टोफू: लंच या डिनर में पनीर या टोफू शामिल करें।

सोया चंक्स: सोया चंक्स को सब्जी, पुलाव या सलाद में शामिल किया जा सकता है।

दही और छाछ: खाने के साथ दही या छाछ लेना एक आसान विकल्प है।

सत्तू: सत्तू को शरबत या दूसरे व्यंजनों के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है।

अंडे और चिकन: नॉन-वेजिटेरियन लोग अंडे, मछली या कम फैट वाले मीट को प्रोटीन के अच्छे स्रोत के तौर पर डाइट में शामिल कर सकते है।

Written by Rozi Sinha