भारतीय रेलवे के एसी कोच में यात्रा करने वाले लगभग हर यात्री को बेडरोल किट दी जाती है। इस किट में एक तकिया, तकिया कवर, दो चादरें, एक तौलिया और एक कंबल शामिल होता है। हालांकि, ज्यादातर यात्रियों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर रेलवे एक की बजाय दो चादरें क्यों देता है। कई लोग दोनों चादरों को सीट पर बिछा लेते हैं, जबकि कुछ एक चादर बिछाकर दूसरी को ओढ़ लेते हैं। अब रेल मंत्रालय ने इस सवाल का जवाब देते हुए दो चादरों के सही इस्तेमाल की जानकारी दी है।

रेल मंत्रालय के मुताबिक, बेडरोल किट में दी जाने वाली दोनों चादरों का उद्देश्य अलग-अलग है। पहली चादर सीट या बर्थ पर बिछाने के लिए होती है, ताकि यात्री साफ-सुथरी सतह पर आराम कर सके। वहीं दूसरी चादर का इस्तेमाल कंबल ओढ़ते समय उसके नीचे करना चाहिए। यानी यह चादर यात्री के शरीर और कंबल के बीच एक सुरक्षा परत का काम करती है।

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इसके पीछे सबसे बड़ी वजह साफ-सफाई और स्वास्थ्य से जुड़ी है। रेलवे के अनुसार, बेडरोल में दी जाने वाली चादरों और तकिया कवर को हर इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह धोया जाता है, लेकिन ऊनी कंबल को हर यात्रा के बाद साफ करना संभव नहीं होता। ऐसे में दूसरी चादर कंबल के सीधे संपर्क से बचाकर बेहतर हाइजीन सुनिश्चित करती है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा भी कम होता है और यात्रा अधिक सुरक्षित व आरामदायक बनती है।

यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए रेलवे ने अब एक नई व्यवस्था भी शुरू की है। कुछ ट्रेनों में कंबल के साथ अलग से कंबल कवर दिया जा रहा है। इससे यात्रियों को कंबल के नीचे दूसरी चादर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फिलहाल यह सुविधा उत्तर पश्चिम रेलवे की कुछ ट्रेनों और कामाख्या-हावड़ा के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में शुरू की गई है। रेलवे का कहना है कि यात्रियों से मिले सकारात्मक फीडबैक के आधार पर इस व्यवस्था को आगे अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जा सकता है।

Written by Rozi Sinha