समुद्र के बीच अपनी पूरी जिंदगी बिताने वाले एक अनोखे समुदाय के बारे में आपने शायद सुना होगा— ‘बाजाऊ’ (Bajau) लोग। इन्हें अक्सर दुनिया के आख़िरी सच्चे समुद्री खानाबदोश कहा जाता है। इनका जीवन किसी एक जमीन, देश या सीमा से बंधा नहीं होता। न इनके पास स्थायी घर होते हैं, न ही पासपोर्ट या कोई तय ठिकाना। इनकी पूरी दुनिया समुद्र और नावों के इर्द-गिर्द घूमती है।

नव पर जन्म लेते हैं बाजाऊ समुदाय के लोग

कहा जाता है कि कई बाजाऊ परिवारों में बच्चों का जन्म भी नावों पर ही होता है और वे अपना बचपन पानी पर तैरते हुए घरों में ही बिताते हैं। इनके लिए समुद्र सिर्फ पानी का विशाल विस्तार नहीं, बल्कि जीवन जीने का पूरा सहारा है—यहीं से भोजन मिलता है और यहीं इनकी रोज़मर्रा की जिंदगी चलती है। पीढ़ियों से ये लोग लगातार समुद्र में घूमते रहते हैं, इसलिए इन्हें किसी एक देश की सीमाओं में बांधना मुश्किल है।

वैज्ञानिक शोधों से ये बात आई है सामने

इनकी सबसे दिलचस्प बात उनकी गोताखोरी की क्षमता मानी जाती है। बाजाऊ समुदाय के लोग बचपन से ही पानी में उतरना सीख लेते हैं और बिना किसी आधुनिक उपकरण के काफी गहराई तक डुबकी लगा सकते हैं—कभी-कभी लगभग 100 फीट या उससे भी ज्यादा। वैज्ञानिक शोधों में यह भी पाया गया है कि लंबे समय से समुद्री जीवन के कारण इनके शरीर में कुछ जैविक बदलाव आए हैं, जिनकी वजह से ये पानी के अंदर बेहतर तरीके से देख पाते हैं।

कान के पर्दे फोड़ने की दर्दनाक प्रथा

एक और चौंकाने वाली बात यह है कि गहरे पानी के दबाव से बचने के लिए कुछ बाजाऊ लोग बचपन में अपने कानों के पर्दे फोड़ लेते हैं। एक पारंपरिक और दर्दभरी प्रक्रिया होते हैं, जिससे बाद में उन्हें सुनने में कमी आ सकती है। इसके बावजूद, समुद्र में शिकार और जीवनयापन के लिए वे इसी परंपरागत तरीके पर निर्भर रहते हैं।

 

     Written By Toshi Shah