Share Market News: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर लगातार जारी है। गुरुवार को भी घरेलू इक्विटी बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में लाल निशान पर बंद हुआ। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 363.66 अंक की गिरावट के साथ 76,391.39 पर बंद हुआ। जबकि एनएसई निफ्टी 126.65 अंक फिसलकर 23,869.60 के स्तर पर आ गया। पूरे दिन बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला और अधिकांश सेक्टर नुकसान में रहे।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा रही बिकवाली
गुरुवार के कारोबार में निफ्टी के कई बड़े शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला। सबसे ज्यादा गिरावट अडानी एंटरप्राइजेज, श्रीराम फाइनेंस, नेस्ले इंडिया, अडानी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस के शेयरों में दर्ज की गई। इन कंपनियों के शेयरों में हुई बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों पर भी नकारात्मक असर डाला।
कुछ शेयर मजबूती के साथ बंद हुए
हालांकि, बाजार की कमजोरी के बीच कुछ शेयर मजबूती के साथ बंद होने में सफल रहे। बजाज ऑटो, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीसीएस और आयशर मोटर्स के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों को कुछ राहत जरूर मिली।
सेक्टोरल इंडेक्स में रियल्टी सबसे कमजोर
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी इंडेक्स सबसे ज्यादा दबाव में रहा और करीब 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, इंफ्रास्ट्रक्चर, पीएसयू बैंक और एनर्जी इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली।
मेटल, फार्मा, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी नुकसान में बंद हुए। दूसरी ओर ऑटो सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जिससे इस सेक्टर के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।
आखिर क्यों टूटा बाजार?
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी है। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई में इजाफे की आशंका बढ़ जाती है। यही चिंता निवेशकों की धारणा पर भारी पड़ी।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सऊदी तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों ने भी वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी चिंता
बाजार पर दबाव बढ़ाने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने भी अहम भूमिका निभाई। आंकड़ों के अनुसार एफआईआई ने एक बार फिर लगभग 819 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। विदेशी निवेशकों के लगातार पैसे निकालने से बाजार में निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।
इसके साथ ही एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू बाजार की चाल को प्रभावित किया। वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता का असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिला।
आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है?
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती और पश्चिम एशिया से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होते, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसके अलावा निवेशकों की नजर अब कंपनियों के तिमाही नतीजों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतें ही बाजार की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभा सकती हैं।
Written By: Geeta Sharma