आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और लगातार बढ़ते काम के दबाव का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। खासकर दफ्तरों में लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों में हृदय रोग, डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। हालिया एक रिपोर्ट के मुताबिक, जो कर्मचारी साल में कम से कम तीन बार नियमित हेल्थ चेकअप कराते हैं, उनके अस्पताल में भर्ती होने की संभावना अन्य कर्मचारियों की तुलना में काफी कम होती है।
सिर्फ टेस्ट कराना नहीं, रिपोर्ट पर कार्रवाई भी जरूरी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई कर्मचारी स्वास्थ्य जांच तो करा लेते हैं, लेकिन रिपोर्ट मिलने के बाद डॉक्टर से सलाह लेने या इलाज शुरू करने में लापरवाही बरतते हैं। आधे से अधिक लोग जांच के बाद कोई जरूरी कदम नहीं उठाते, जिससे बीमारी का खतरा बना रहता है और समय पर उपचार नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्थ चेकअप तभी प्रभावी माना जाएगा, जब उसके आधार पर उचित इलाज और नियमित फॉलो-अप भी किया जाए।
कर्मचारियों में बढ़ रही दिल की बीमारी और डायबिटीज
अध्ययन के अनुसार, कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के बीच हृदय रोगों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कम उम्र के कर्मचारियों में भी हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी अन्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं। इसके साथ ही डायबिटीज के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना, तनाव, अपर्याप्त नींद और असंतुलित खानपान को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
उम्र के साथ बदलती हैं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां
रिपोर्ट बताती है कि अलग-अलग आयु वर्ग के कर्मचारियों की स्वास्थ्य समस्याएं भी अलग होती हैं। युवा कर्मचारियों में तनाव और चिंता की समस्या अधिक देखने को मिलती है। वहीं 30 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में काम का दबाव, थकान और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अधिक उम्र के कर्मचारियों में पुरानी और गंभीर बीमारियों का जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा होता है।
ये भी पढ़ें- सुबह की बनी रोटी शाम तक रहेगी मुलायम, जानें नरमी बनाए रखने के ये आसान तरीके
कंपनियों को अपनाना होगा व्यापक हेल्थ मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश कंपनियां अभी कर्मचारियों की सेहत के लिए केवल हेल्थ चेकअप तक ही सीमित हैं। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि संस्थानों को नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ डॉक्टरों की सलाह, समय-समय पर फॉलो-अप और जरूरी मेडिकल सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी चाहिए। इससे कर्मचारियों की सेहत बेहतर होगी और गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
Written By Toshi Shah