हर देश की अपनी पारंपरिक देसी शराब होती है, और नेपाल की ‘रक्सी’ उसी का एक मशहूर उदाहरण है। यह आमतौर पर बाजरा, मक्का, चावल, जौ या कभी-कभी फलों से बनाई जाती है, जिसे गांवों में महिलाएं घरेलू तरीकों से तैयार करती हैं। इन दिनों सोशल मीडिया पर रक्सी बनाने की पूरी प्रक्रिया का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग देख रहे हैं कि कैसे साधारण अनाज को फर्मेंट कर शराब बनाई जाती है। खासकर सर्दियों में बुजुर्ग इसे बड़े शौक से पीते हैं, क्योंकि यह शरीर को गर्म रखती है और थकान कम करने में मदद करती है।
पुरानी परंपरा, खास तरीका: ऐसे बनती है रक्सी
रक्सी बनाने की विधि सदियों से चली आ रही है। इसमें सबसे पहले बाजरा या मक्का जैसे अनाज को अच्छी तरह साफ किया जाता है, फिर उसे उबालकर या भाप में पकाया जाता है ताकि उसमें मौजूद स्टार्च नरम हो जाए। इसके बाद अनाज को ठंडा किया जाता है और उसमें 'मार्चा' नाम का प्राकृतिक खमीर मिलाया जाता है, जो जड़ी-बूटियों, चावल के आटे और प्राकृतिक यीस्ट-मोल्ड से तैयार होता है। यही खमीर स्टार्च को पहले शक्कर और फिर अल्कोहल में बदल देता है। तैयार मिश्रण को मिट्टी के बर्तनों, प्लास्टिक ड्रम या पारंपरिक घ्याम्पो में भरकर अच्छी तरह सील किया जाता है और गर्म जगह पर रखा जाता है। यह प्रक्रिया 7 दिन से लेकर 35 दिन या उससे भी ज्यादा चल सकती है, जितना लंबा फर्मेंटेशन, उतनी ज्यादा ताकत और गहरा स्वाद।
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फायदे और सावधानियां: रक्सी का असर
स्थानीय लोगों के अनुसार, ठंड के मौसम में रक्सी शरीर को गर्म रखने में मदद करती है, जोड़ों के दर्द में राहत देती है और थकान कम करती है। पारंपरिक तरीके से बनने के कारण इसमें कुछ प्राकृतिक पोषक तत्व भी मौजूद रहते हैं। हालांकि, इसका अधिक सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। नेपाल में सरकार इसके घरेलू उत्पादन पर नियंत्रण रखने की कोशिश करती है, लेकिन दूरदराज के इलाकों में आज भी यह परंपरा आम तौर पर जारी है।
Written By - Namita Verma