Sonipat News: सोनीपत जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है,जिसने सोचने पर मजबूर कर दिया है। बता दें, जिस पिता ने अपनी बेटियों को पढ़ा-लिखाकर आत्मनिर्भर बनाया, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया, उसी पिता को जीवन के अंतिम क्षणों उनके पास कोई संतान मौजूद नहीं रहा। जानकारी के अनुसार बुजुर्ग वृद्धाश्रम में रह रहे थे, उनकी मृत्यु के बाद उनकी बेटियां अंतिम दर्शन के लिए भी नहीं पहुंच सकीं। यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक रिश्तों और बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल भी उठाता है।
महाराष्ट्र के बड़े कपड़ा व्यापारी थे शिवचरण रतन गुप्ता
जानकारी के अनुसार, शिवचरण रतन गुप्ता मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले थे। अपने समय में एक प्रतिष्ठित कपड़ा व्यापारी के रूप में पहचाने जाते थे। उन्होंने अपने जीवन में मेहनत से अच्छी आर्थिक स्थिति बनाई और अपनी तीनों बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाई।
उनका कोई बेटा नहीं था, लेकिन उन्होंने बेटियों को किसी भी कमी का एहसास नहीं होने दिया। उनकी दो बेटियां अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। करीब डेढ़ वर्ष पहले वे अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रहने आए थे। पत्नी के निधन के बाद शिवचरण गुप्ता अकेले हो गए और वृद्धाश्रम में ही जीवन व्यतीत कर रहे थे।
बीमारी की सूचना के बाद भी नहीं पहुंचीं बेटियां
वृद्धाश्रम संचालक आनंद के अनुसार, करीब 20 दिन पहले शिवचरण गुप्ता की तबीयत गंभीर रूप से खराब हुई थी। इसकी सूचना उनकी तीनों बेटियों अनीता, निशा और प्रिया को दी गई थी। आश्रम प्रबंधन ने उनसे पिता से मिलने आने का आग्रह भी किया,लेकिन किसी कारणवश वे नहीं आ सकीं।
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बताया गया कि बीमारी के दौरान पिता अपनी बेटियों से बातचीत की उम्मीद करते रहे। उनके पास मोबाइल फोन था, लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद बेटियों की ओर से बातचीत भी कम हो गई।
वीडियो कॉल पर देखा अंतिम संस्कार
शिवचरण गुप्ता की बड़ी बेटी अनीता नेपाल में अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं,जबकि दूसरी बेटी निशा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और छोटी बेटी प्रिया मुंबई में रहती हैं। पिता के निधन के बाद बड़ी बेटी ने ऑनलाइन माध्यम से 5100 रुपये भेजकर वृद्धाश्रम संचालक से अंतिम संस्कार कराने का अनुरोध किया। बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देखी। शुरुआत में उन्होंने अस्थियां सुरक्षित रखने की बात कही थी,लेकिन बाद में समय की कमी का हवाला देते हुए आश्रम संचालक से ही गंगा नदी में अस्थि विसर्जन कराने को कहा।
Written By: Geeta Sharma