पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत करीब 79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। पिछले एक सप्ताह में तेल की कीमतों में लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कहा जा रहा है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ी चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के अनुसार, अमेरिका की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को लेकर नए कदम उठाने की बात कही गई है। इसके अलावा, इस रास्ते से गुजरने वाले अन्य कार्गो पर भुगतान संबंधी शर्तें लागू करने की योजना ने भी बाजार में चिंता बढ़ाई है। 

रूसी ऊर्जा खरीद पर प्रतिबंध की चर्चा से बढ़ी अनिश्चितता

ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ाने वाला एक अन्य कारण रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंधों की चर्चा है। यदि इस तरह के प्रतिबंध लागू होते हैं तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। रूस दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है। ऐसे में रूसी तेल और गैस की आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर पड़ सकता है।

अमेरिका-ईरान तनाव से बिगड़ा माहौल

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ने से बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। संघर्ष विराम समाप्त होने के बाद दोनों देशों के बीच हमलों की खबरों ने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में गतिविधियों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बड़ी बाधा का सीधा असर तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा, यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव ने भी पश्चिम एशिया की स्थिति को और जटिल बना दिया है। क्षेत्र में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां ऊर्जा बाजार के लिए जोखिम पैदा कर रही हैं।

शेयर बाजारों में भी बढ़ी हलचल

मिडिल-ईस्ट संकट का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। निवेशक अब ऊर्जा कीमतों, महंगाई और वैश्विक आर्थिक विकास पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर सतर्क हो गए हैं। भारतीय शेयर बाजार में भी लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि महंगे तेल से आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव आ सकता है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति, आपूर्ति बाधाओं और प्रमुख देशों के फैसलों पर निर्भर करेगी।

 Written By: Geeta Sharma