UP Election 2027: 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संगठन में बड़े फेरबदल किए हैं। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बदलाव करते हुए नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद के ससुर और वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ से चार राज्यों की बड़ी जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। इसके साथ ही, मायावती ने आगामी यूपी चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों और भ्रम पर स्थिति साफ कर दी है।

मुख्य बदलाव और नई जिम्मेदारियां
अशोक सिद्धार्थ को केरल, कर्नाटक, गुजरात और दिल्ली के प्रभारी पद से हटा दिया गया है। साथ ही उनके करीबी नितिन सिंह को भी पदमुक्त कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, अशोक सिद्धार्थ को अब उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, मिर्जापुर और सोनभद्र मंडल का प्रभार सौंपा जा सकता है। नेशनल कोऑर्डिनेटर एवं मध्य प्रदेश के प्रभारी राजाराम को अब केरल, गुजरात और कर्नाटक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। नेशनल कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम को दिल्ली में बसपा का संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें पंजाब के प्रभारी पद से मुक्त किया गया है। पंजाब में संगठन का काम देखने के लिए रणधीर सिंह बेनीवाल को नया प्रभारी नियुक्त किया गया है।

25 सीटों पर उम्मीदवार फाइनल, मायावती ही लेंगी अंतिम फैसला
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव की तैयारियों के लिए लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में कई स्तर की बैठकें की गई हैं। मायावती ने स्वयं साक्षात्कार लेकर लगभग 25 (दो दर्जन से अधिक) सीटों पर प्रत्याशियों के नाम फाइनल कर दिए हैं। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों का अंतिम चयन वही करती हैं।

आकाश आनंद की भूमिका पर मायावती ने की स्थिति साफ
मीडिया में चल रही उन खबरों का मायावती ने खंडन किया जिनमें दावा किया जा रहा था कि उम्मीदवारों के चयन की जिम्मेदारी आकाश आनंद को सौंपी गई है। वहीं मायावती ने कहा कि उम्मीदवार चयन को लेकर राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद के संबंध में तरह-तरह के भ्रम फैलाए जा रहे हैं, जिनमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।

बसपा में उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप हमेशा से मेरे द्वारा ही दिया जाता है और आगे भी यही व्यवस्था रहेगी। 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली बसपा का प्रदर्शन 2012 के बाद से गिरा है और 2022 के चुनावों में पार्टी केवल 1 सीट पर सिमट गई थी। ऐसे में 2027 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए मायावती खुद कमान संभालकर संगठन को मजबूत करने में जुटी हैं।

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Written By Shailesh Yadav