सावन का पावन महीना शुरू होते ही शिवभक्तों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। अब श्रद्धालुओं की नजर पहले सावन सोमवार पर है, जिसे भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ दिनों में माना जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं।

धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अविवाहित कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है, जबकि विवाहित महिलाओं के सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना पूर्ण होती है। इसलिए व्रत के दौरान कुछ धार्मिक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है।

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पूजा के समय शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा और चंदन अर्पित करें। हालांकि तुलसी के पत्ते, हल्दी और केतकी के फूल भगवान शिव को नहीं चढ़ाने चाहिए। साथ ही टूटे या खंडित बेलपत्र भी अर्पित करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें पूजा में शुभ नहीं माना जाता। सावन सोमवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को दिन में सोने से बचना चाहिए और प्रदोष काल में भगवान शिव की विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाने, ब्रह्मचर्य का पालन करने और मन, वचन व कर्म से संयम रखने की भी सलाह दी जाती है।

व्रत के दिन मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना भी शुभ माना गया है। इसके अलावा इस दिन काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सफेद, पीला, हरा, लाल या केसरिया रंग अधिक शुभ माने जाते हैं। इस बार सावन सोमवार 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त 2026 को पड़ेंगे। वहीं उज्जैन का एक प्राचीन शिव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहता है, जिसके कपाट पूरे साल बंद रहते हैं और केवल सावन माह में एक दिन के लिए ही दर्शनार्थ खोले जाते हैं।

Written by Rozi Sinha